Exclusive: क्या अब राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय की वापसी होगी या नहीं? जवाब मिल गया

कुमार अभिषेक

• 04:05 PM • 07 Jul 2026

Swami Govind Dev Giri Interview on Ram Mandir Dispute: राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद और चंपत राय व अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने यूपी Tak से खास बातचीत में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उन्होंने चंपत राय को क्लीन चिट देते हुए उन्हें 'भ्रष्टाचारी नहीं बल्कि जिद्दी' बताया और अनिल मिश्रा की भूमिका पर बड़ा बयान दिया.

Champat Rai

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद और चंपत राय व अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने यूपी Tak से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कई बड़े खुलासे किए. उन्होंने साफ किया कि बैठक के फैसले के अनुसार चंपत राय और अनिल मिश्रा अब ट्रस्ट से बाहर हो चुके हैं. हालांकि इस पूरे विवाद के बीच कोषाध्यक्ष ने चंपत राय का बचाव करते हुए उन्हें क्लीन चिट देने की कोशिश की, लेकिन साथ ही उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल भी उठाए.

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चंपत राय भ्रष्टाचारी नहीं लेकिन जिद्दी थे

जब उनसे सवाल किया गया कि चंपत राय की नाक के नीचे चोरी हुई तो वे निर्दोष कैसे हुए? इस पर स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा 'जिन्होंने पहले दिन से इस पूरे आंदोलन और कार्य को खड़ा किया उनके अंतःकरण की पवित्रता पर हमें पूरा विश्वास है. उनके द्वारा करप्शन का कोई कार्य होना संभव ही नहीं है. दोष उनकी कार्य पद्धति का है. वे असावधान रहे, उन्होंने अनेक लोगों पर अंधविश्वास किया और बहुत सारे काम अकेले अपने ऊपर झेल लिए. इसी वजह से यह संकट खड़ा हुआ.'

जब उनसे पूछा गया कि क्या चंपत राय का अहंकार उन पर हावी रहा? इसपर कोषाध्यक्ष ने कहा कि 'मैं अहंकार शब्द का प्रयोग ठीक नहीं मानता. लेकिन निश्चित रूप से वे जिद्दी हैं. वे अपनी ही बात सुनते हैं. अनेक मामलों में उन्होंने किसी की बात नहीं सुनी और अपनी ही चलाई.' बातचीत के दौरान उन्होंने संकेत दिया कि फिलहाल चंपत राय की वापसी ट्रस्ट में नहीं होगी. उन्होंने कहा- "आज की स्थिति में वे बाहर हैं."

अनिल मिश्रा के दोष पर क्या बोले

एसआईटी की जांच रिपोर्ट में अनिल मिश्रा को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराए जाने पर स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि अनिल मिश्रा दोषी हैं या नहीं, यह मैं नहीं बल्कि एसआईटी तय करेगी. करोड़ों हिंदुओं की आस्था को पहुंचे आघात और खुद कोषाध्यक्ष होने के नाते अपनी जिम्मेदारी के सवाल पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा 'हुंडी में जो कुछ भी घपला हुआ उसमें मेरी जिम्मेदारी नहीं है. वह मेरा कार्यक्षेत्र भी नहीं था. मैं अयोध्या में नहीं रहता हूं. हुंडी का दैनिक कार्य स्थानीय न्यासी देखते थे. उसका जो भी एसओपी बना था वह अनिल मिश्रा ने बनाया था, मैंने नहीं. मुझे भी वह इसी महीने देखने को मिला. मेरा काम सिर्फ अकाउंट में जमा होने वाले धन और उसके खर्च की निगरानी रखना था. जब हमारे साथी काम कर रहे थे और वह उनकी जिम्मेदारी थी, तो मुझे उसमें दखल देने की आवश्यकता नहीं लगी.'

अब राम मंदिर ट्रस्ट में होगी सीईओ की एंट्री

चढ़ावा चोरी के इस बड़े विवाद के बाद ट्रस्ट की साख पर जो बट्टा लगा है, उसे सुधारने के लिए कोषाध्यक्ष ने बड़े प्रशासनिक बदलावों का संकेत दिया है. उन्होंने बताया कि अब ट्रस्ट के कामकाज को पूरी तरह प्रोफेशनल और अनुशासित बनाने के लिए एक सीईओ की नियुक्ति की जाएगी. यह सीईओ एक ब्यूरोक्रेटिक बैकग्राउंड का कड़क अधिकारी होगा जो पूरी कठोरता से नियमों का पालन कराएगा. इसके लिए एक विशेष समिति बनाई गई है जो 3 नाम शॉर्टलिस्ट करके देगी, जिनमें से किसी एक को नया सीईओ चुना जाएगा.

आखिर में जब यूपी Tak ने स्वामी गोविंद देव गिरि से तीखा सवाल पूछा कि 'क्या इतने बड़े आस्था के खिलवाड़ के बाद चंपत राय और ट्रस्ट को जनता से माफी मांगनी चाहिए?' तो स्वामी गोविंद देव गिरी इस सवाल का जवाब देने से बचते नजर आए और बिना कुछ बोले आगे बढ़ गए. हालांकि उन्होंने दावा जरूर किया कि भूलों को सुधारने का प्रामाणिक प्रयास किया जा रहा है और बेहतर काम करके वे जनता का विश्वास दोबारा जीतेंगे.

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