‘मैंने ब्राह्मण होकर चंपत राय जी के पैर पकड़े, उनका सत्यानाश…’ राम मंदिर में काम कर चुके शिवांक का फूटा गुस्सा, खूब सुनाया

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पूर्व कर्मचारी शिवांक त्रिपाठी के दावों ने जांच को नया मोड़ दिया है. अयोध्या में भर्ती प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और काउंटिंग सिस्टम को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच जारी है.

Ram Mandir Donation Theft Case

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Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है. इस बीच मंदिर में आउटसोर्सिंग कर्मचारी के तौर पर काम कर चुके शिवांक त्रिपाठी ने UP तक को दिए इंटरव्यू में कई गंभीर दावे किए हैं. शिवांक ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की भर्ती, काउंटिंग प्रक्रिया और कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि मंदिर परिसर में कुछ लोगों का ही प्रभाव था और कई व्यवस्थाओं में गंभीर खामियां मौजूद थीं. हालांकि, ये सभी दावे शिवांक त्रिपाठी के हैं और इनकी आधिकारिक पुष्टि जांच एजेंसियों की ओर से नहीं की गई है.

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शिवांक का दावा- चंपत राय के पैर पकड़कर मदद मांगी थी

शिवांक त्रिपाठी ने इंटरव्यू में दावा किया कि बाइक चोरी होने के बाद उन्होंने अपनी समस्या लेकर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी मुलाकात की थी. उन्होंने कहा 'माननीय चंपत राय जी का मैंने पैर भी पकड़ा है. मैंने कहा आप कलयुग के राम हैं, कलयुग के हनुमान हैं. प्रभु हमारा कुछ कल्याण करिए. गरीब आदमी हैं, आकर सेवा में ड्यूटी कर रहे हैं. तब इन्होंने कहा कि मैं तुम्हें गाड़ी दूंगा. इस ताल्लुक से बात हुई थी. मैं ब्राह्मण होकर उनका पैर पकड़ा, लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं हुआ, उनका सत्यानाश होना निश्चित है.' शिवांक ने आगे कहा, 'जब हमारी बाइक चोरी हुई तो हमने थाना और ट्रस्ट दोनों जगह आवेदन दिया, लेकिन कहीं से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. कंपनी ट्रस्ट पर जिम्मेदारी डालती रही और ट्रस्ट कंपनी पर.'

पूर्व कर्मचारी ने किया बड़ा दावा

शिवांक त्रिपाठी ने बातचीत के दौरान दावा किया कि मंदिर के संचालन में कुछ चुनिंदा लोगों का ही प्रभाव था. उन्होंने कहा 'तीन-चार लोगों का पूरे मंदिर में चलता था. अनिल मिश्रा जी, गोपाल राव और उसके बाद टिन्नू यादव. टिन्नू यादव ड्राइवर था, लेकिन उसकी भी काफी चलती थी.' शिवांक का आरोप है कि कई कर्मचारियों की भर्ती या तो पहचान के आधार पर होती थी या फिर पैसे लेकर कराई जाती थी. उन्होंने कहा 'जो ट्रस्ट में हुआ, या तो खास होगा या फिर पैसा दिया होगा. बस दो ही चीजों में से एक चीज थी.' हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि रिश्वत के आरोपों के संबंध में उनके पास प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं हैं और यह बातें कर्मचारियों के बीच चर्चा में सुनने को मिलती थीं.

काउंटिंग सिस्टम पर भी उठाए सवाल

पूर्व कर्मचारी ने दावा किया कि दिसंबर 2025 में उनकी बाइक मंदिर के पास से चोरी हो गई थी. इसके बाद उन्हें पता चला कि आसपास लगे कई सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे. उन्होंने कहा 'जब हमारी गाड़ी गायब हुई तब पता चला कि कैमरा खराब है. हमने कई बार आवेदन दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. येलो जोन और रेड जोन के कैमरे भी खराब थे.' शिवांक ने यह भी दावा किया कि जिस स्थान पर दान की गिनती होती थी, वहां सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षित स्तर की नहीं थी. उनके अनुसार 'जहां काउंटिंग होती थी, वहां कई बार लोगों को आते-जाते देखा. एसआईएस गार्ड सिर्फ एंट्री दर्ज करता था, उसके आगे उसकी कोई भूमिका नहीं थी. अगर कोई कर्मचारी अंदर चला जाता था तो उसे रोकने वाला कोई नहीं था.'

जांच पर भी कही बड़ी बात

शिवांक त्रिपाठी ने मौजूदा जांच को लेकर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा 'अभी तो छोटी मछलियां जाल में आई हैं, बड़ी मछलियां अभी भी समुद्र में हैं. उन्हें पकड़ना बाकी है.' उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें गिरफ्तार किए गए कुछ लोगों से परिचय था, लेकिन उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि वे चोरी जैसी घटना में शामिल हो सकते हैं. साथ ही उन्होंने दावा किया कि काउंटिंग व्यवस्था के दौरान कई बार नकदी की आवाजाही देखी थी, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किसी अवैध गतिविधि का प्रत्यक्ष प्रमाण था. फिलहाल राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच एसआईटी कर रही है और अब तक कई आरोपियों से पूछताछ, छापेमारी और दस्तावेजों की जांच की जा चुकी है. जांच एजेंसियां पूरे मामले के हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं और आधिकारिक निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे.