UP Tak Exclusive: गरीब ब्राह्मण होकर मैंने चंपत राय जी के पैर पकड़े... राम मंदिर के पूर्व कर्मचारी शिवांग ने सुनाई नई कहानी

Ram Mandir Donation Theft Case Exclusive: राम मंदिर में लंबे समय तक काम करने वाले पूर्व कर्मचारी शिवांग ने यूपी Tak के इंटरव्यू में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. शिवांग का दावा है कि मंदिर में भर्तियां रिश्वत या रसूख से होती थीं और चढ़ावा काउंटिंग रूम में कुछ खास लोगों की गुंडई चलती थी. उन्होंने कहा कि अभी सिर्फ छोटी मछलियां पकड़ी गई हैं, बड़ी मछलियां बाहर हैं.

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UP News: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) की टीम अयोध्या में डेरा डाले हुए है. इसी बीच, यूपी Tak ने राम मंदिर परिसर में लंबे समय तक काम करने वाले पूर्व कर्मचारी शिवांग से खास बातचीत की है. मंदिर के उद्घाटन के समय से लेकर दिसंबर 2025 तक मंदिर में कार्यरत रहे शिवांग ने परिसर के भीतर की सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की भर्ती और रसूखदारों के दखल को लेकर कई सनसनीखेज दावे किए हैं. शिवांग का साफ कहना है कि इस चोरी में अभी सिर्फ 'छोटी मछलियां' जाल में आई हैं, जबकि 'बड़ी मछलियां' अभी भी समुद्र में खुली घूम रही हैं.

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'काउंटिंग रूम में चलती थी गुंडई, बेबस थे सुरक्षाकर्मी'

चढ़ावा गिनती की व्यवस्था पर बात करते हुए शिवांग ने बताया कि वहां सुरक्षा के दावे सिर्फ कागजी थे. उन्होंने कहा, "मैं स्टाफ लॉकर में भी ड्यूटी पर रहा हूं. काउंटिंग रूम के पास ही मेरी ड्यूटी रहती थी. वहां गेट पर तैनात एसआईएस (SIS) गार्ड्स की कोई हैसियत नहीं थी. अगर गार्ड्स चेकिंग के लिए कहते भी थे, तो अंदर जाने वाले लोग अपनी दबंगई दिखाते थे. नियम के मुताबिक स्टाफ लॉकर में मोबाइल और पॉकेट मनी जमा करनी होती थी, लेकिन रसूखदार लोग सब कुछ अंदर लेकर जाते थे."

शिवांग ने दावा किया कि काउंटिंग रूम में कोई भी कर्मचारी बिना रोक-टोक घुस जाता था और सुरक्षाकर्मी केवल आने-जाने वालों की एंट्री करने तक ही सीमित थे.

'भर्ती के लिए उड़ती थी 20 से 30 हजार की अफवाह'

भर्तियों में गड़बड़ी के सवाल पर पूर्व कर्मचारी ने बताया कि मंदिर में ₹9,200 की न्यूनतम सैलरी पर काम होता था, जिसमें कभी छुट्टी भी नहीं मिलती थी. उन्होंने कहा कि वहां काम पाने के दो ही रास्ते थे "या तो आप ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों के बेहद खास और परिचित हों, या फिर पैसा देकर आए हों." शिवांग के मुताबिक, उस दौरान कर्मचारियों के बीच 20000 से 30000 रुपये रिश्वत लेकर भर्ती कराए जाने की अफवाहें खूब उड़ती थीं.

मंदिर के रसूखदारों का नाम आया सामने

इंटरव्यू के दौरान जब शिवांग से पूछा गया कि मंदिर के भीतर किसका सिक्का चलता था और काउंटिंग आदि में किसका दखल था, तो उन्होंने सीधे तौर पर तीन-चार नाम लिए. उन्होंने कहा, "पूरे मंदिर में मुख्य रूप से अनिल मिश्रा, गोपाल राव, चंपत राय और उनके ड्राइवर टिन्नू यादव का नाम चलता था. टिन्नू यादव ट्रस्ट का कोई पदाधिकारी नहीं था, वह सिर्फ ड्राइवर था, लेकिन उसकी पूरी चलती थी और वह सब कुछ संभाल रहा था."

गिरफ्तार आरोपियों (लवकुश मिश्रा, अकल्प, विनय) के बारे में उन्होंने कहा कि मुलाकात तो हुई थी, लेकिन देखकर नहीं लगता था कि ये लोग चोर हैं, हालांकि इन लोगों के ताल्लुक बहुत मजबूत और ऊंचे थे.

'येलो और रेड जोन के कैमरे खराब थे, मेरी बाइक चोरी हो गई'

शिवांग ने नौकरी छोड़ने की मुख्य वजह अपने साथ हुई एक घटना को बताया. उन्होंने कहा कि 28 दिसंबर 2025 को राम मंदिर के ठीक सामने बैरियर (डी-पॉइंट) के पास से उनकी बाइक चोरी हो गई थी. वह अति-सुरक्षित येलो और रेड जोन का इलाका था, लेकिन उन्हें बताया गया कि वहां के सीसीटीवी कैमरे खराब थे.

मैंने चंपत राय के पैर पकड़े: शिवांग

इस बात से दुखी होकर शिवांग ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पैर भी पकड़े. बकौल शिवांग, "मैंने चंपत राय जी के पैर पकड़कर कहा कि मैं गरीब ब्राह्मण हूं, मेरा कल्याण करिए. आप कलयुग के राम और हनुमान हैं. उन्होंने मुझसे तल्ख लहजे में कहा मैं तुम्हें गाड़ी दूंगा? मैं ब्राह्मण होकर उनके पैर पकड़े, उनका सत्यानाश होना तय है."

शिवांग ने बताया कि 'बाद में कुछ नहीं हुआ. जब कोई अनहोनी होती है तो ट्रस्ट कहता है आउटसोर्सिंग कंपनी से बात करो, और कंपनी कहती है ट्रस्ट से बात करो. इसी शोषण और अनदेखी से तंग आकर मैंने काम छोड़ दिया."

पूर्व कर्मचारी के इन बड़े और गंभीर आरोपों ने अब अयोध्या पुलिस और एसआईटी की जांच के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं. देखना होगा कि तफ्तीश की आंच अब किन बड़े नामों तक पहुंचती है.

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