100-200 मीटर की दूरी, एक ही कॉलोनी... अयोध्या में आस-पास मिले राम मंदिर चंदा चोरी के आरोपियों के ठिकाने

राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए तथ्य सामने आ रहे हैं. पुलिस जांच में पता चला है कि इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से पांच आरोपी या तो एक-दूसरे के बेहद करीब रहते हैं या फिर आपस में रिश्तेदार हैं.

Ram Mandir Donation Theft Case

Ram Mandir Donation Theft Case

सिमर चावला

• 01:59 PM • 28 Jun 2026

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Ram Mandir Donation Theft Case: राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए तथ्य सामने आ रहे हैं. पुलिस जांच में पता चला है कि इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से पांच आरोपी या तो एक-दूसरे के बेहद करीब रहते हैं या फिर आपस में रिश्तेदार हैं. इनके घरों के बीच महज 100 से 200 मीटर की दूरी है. अब जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या चोरी की पूरी वारदात पहले से बनाई गई साजिश का हिस्सा थी और क्या सभी आरोपी पहले से आपस में समन्वय बनाकर काम कर रहे थे.

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एक ही कॉलोनी में रहते हैं 3 आरोपी

जांच के दौरान सामने आया कि लव कुश मिश्रा का घर कौशलपुरी कॉलोनी में स्थित है और उनके घर के ठीक पीछे अविनाश शुक्ला का मकान है. दोनों के घरों के बीच सिर्फ कुछ कदमों की दूरी है. इसी कॉलोनी में आरोपी अनुकल्प मिश्रा का घर भी करीब 200 मीटर की दूरी पर है. जानकारी के मुताबिक, अनुकल्प मिश्रा ने यह मकान लगभग दो साल पहले खरीदा था. इस तरह अविनाश शुक्ला, लव कुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा तीनों एक ही कॉलोनी में एक-दूसरे के बेहद नजदीक रहते हैं.

पांच आरोपियों की नजदीकी पर जांच का फोकस

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस मामले के आरोपी मनीष यादव और मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के घर भी एक-दूसरे से सटे हुए हैं. यानी कुल आठ आरोपियों में से पांच ऐसे हैं, जो या तो एक ही मोहल्ले में रहते हैं या फिर उनके बीच पारिवारिक संबंध हैं. जांच एजेंसियां इसे बेहद अहम कड़ी मान रही हैं. पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या इन लोगों के बीच पहले से नियमित बातचीत होती थी और क्या मंदिर में दान की रकम की कथित चोरी की योजना मिलकर बनाई गई थी.

आपसी संपर्क की हो रही पड़ताल

जांच एजेंसियां अब आरोपियों के मोबाइल लोकेशन, आपसी बातचीत और पुराने संबंधों की भी विस्तार से जांच कर रही हैं. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या सभी आरोपी किसी साझा नेटवर्क के तहत काम कर रहे थे और चोरी की कथित वारदात को अंजाम देने के लिए पहले से रणनीति बनाई गई थी. इसी एंगल से डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे मामले की हर कड़ी को जोड़कर सच्चाई सामने लाई जा सके.