कौन हैं कृष्ण मोहन जिनकी शिकायत के बाद राम मंदिर चढ़ावा मामले में 8 लोगों के खिलाफ हुई FIR?

Ram Mandir News: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और गहनों की कथित चोरी मामले में ट्रस्टी कृष्ण मोहन की शिकायत पर 8 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है. इस कार्रवाई पर अखिलेश यादव और संजय सिंह ने चंपत राय समेत ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को बचाने का आरोप लगाया है.

Ram Mandir News

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मयंक शुक्ला

• 08:10 AM • 26 Jun 2026

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Ram Mandir News: अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए पैसे और गहनों की कथित चोरी का मामला अब एक बड़े सियासी विवाद में तब्दील हो चुका है. इस पूरे मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस ने कुल आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. हालांकि, इस कार्रवाई के बाद अब यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि क्या जांच के नाम पर सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारी इस जांच के दायरे से पूरी तरह बाहर हैं.

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8 लोगों पर केस दर्ज, इन गंभीर धाराओं में हुई कार्रवाई

राम मंदिर में चढ़ावे और आभूषणों की चोरी की बात सामने आने के बाद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया था. एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी, जिसके बाद अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में आठ लोगों के खिलाफ चोरी, गबन और साजिश जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया. यह केस राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ है.

मामले में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:

  1. रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव
  2. अविनाश
  3. मनीष यादव
  4. लवकुश मिश्रा
  5. अनुकल्प मिश्रा
  6. सुभाष चंद्र
  7. करुणेश पांडे
  8. रमाशंकर मिश्रा

अगर अदालत में इन सभी के खिलाफ आरोप साबित हो जाते हैं, तो इन्हें लंबी सजा भुगतनी पड़ सकती है. फिलहाल यह पूरा मामला गहन जांच के दायरे में है.

जानिए कौन हैं शिकायतकर्ता ट्रस्टी कृष्ण मोहन?

जिस ट्रस्टी की लिखित शिकायत पर पुलिस ने यह एफआईआर दर्ज की है, उनका नाम कृष्ण मोहन है. मूल रूप से हरदोई के रहने वाले कृष्ण मोहन को सितंबर 2025 में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का नया ट्रस्टी नियुक्त किया गया था. ट्रस्ट में यह पद कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद खाली हुआ था.

अगर कृष्ण मोहन की पृष्ठभूमि की बात करें, तो उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई पूरी की है. इसके बाद उन्होंने कुछ साल एटॉमिक एनर्जी विभाग (परमाणु ऊर्जा विभाग) में अपनी सेवाएं दीं. बाद में वे भारतीय वन सेवा (IFS) के लिए चुने गए, जहां उन्होंने महाराष्ट्र कैडर में रहकर काम किया. साल 2012 में सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद वे समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय हो गए और इसी विशिष्ट पहचान के कारण उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट में शामिल किया गया.

निचले कर्मचारियों पर एक्शन से क्यों गरमाई सियासत?

इस पूरी कानूनी कार्रवाई के बाद विवाद इसलिए बढ़ गया है क्योंकि एफआईआर में जिन आठ लोगों को नामजद किया गया है, वे सभी मंदिर के बेहद निचले स्तर के कर्मचारी हैं. इस मामले में ट्रस्ट के बड़े और प्रमुख नामों, जैसे कि महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम कहीं भी शामिल नहीं है. इसी बिंदु को लेकर अब विपक्ष सरकार और जांच एजेंसी पर हमलावर हो गया है.

अखिलेश यादव (सपा): समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सरकार को घेरते हुए कहा कि इस मामले में छोटे कर्मचारियों को जबरन फंसाया जा रहा है और बड़े चेहरों को साफ तौर पर बचाया जा रहा है. उन्होंने आशंका जताई कि एसआईटी (SIT) की यह रिपोर्ट पहले से ही तय करके (फिक्स) बनाई गई प्रतीत होती है.

संजय सिंह (आप): आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी इस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि उन्होंने खुद एसआईटी को जमीन घोटाले से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंपे थे, जिनमें चंपत राय और अन्य बड़े पदाधिकारियों का नाम आना पूरी तरह तय था. लेकिन मुख्य मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाने के लिए जानबूझकर सिर्फ छोटे कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज कर दिया गया है.

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