इस्लाम कबूल करने वाली यूपी की 2 लड़कियों को मिलेंगे ₹25 लाख, इलाहाबाद HC ने दिया आदेश

यूपी तक

• 05:54 PM • 12 Aug 2026

इस्लाम अपनाने वाली दो बालिग बहनों की आजादी से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि दोनों महिलाओं को उनकी इच्छा के खिलाफ पिता के घर में रखा गया था.

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस्लाम अपनाने वाली दो बहनों की आजादी से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने माना कि दोनों महिलाओं को उनके पिता के घर में उनकी इच्छा के खिलाफ रखा गया था. इसके लिए पिता और उत्तर प्रदेश सरकार को संयुक्त रूप से 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है.

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मामला दीया भाटिया उर्फ जोया (20) और अंशु भाटिया उर्फ अमीना अंशु भाटिया (35) से जुड़ा है. दोनों ने हाई कोर्ट को बताया कि उन्होंने अपनी इच्छा, आस्था और अंतरात्मा की आवाज पर इस्लाम अपनाया था. अंशु ने 2020 में और दीया ने 2021 में धर्म परिवर्तन किया था.

कोर्ट ने कहा- बालिग व्यक्ति को अपने फैसले का अधिकार

जस्टिस संदीप जैन ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दोनों महिलाओं से बातचीत की. कोर्ट ने उनके जवाबों को "स्वाभाविक, स्पष्ट और बिना किसी हिचकिचाहट के" बताया. कोर्ट को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि दोनों महिलाएं डर, दबाव, लालच या किसी अनुचित प्रभाव में थीं.

दोनों ने साफ कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से इस्लाम अपनाया है. उन्होंने यह भी कहा कि उनके फैसले के पीछे किसी तरह का बल, धोखा, जबरदस्ती, अनुचित प्रभाव या लालच नहीं था.

हाई कोर्ट ने कहा कि दोनों बालिग हैं और उन्हें अपनी जिंदगी से जुड़े फैसले लेने की पूरी कानूनी क्षमता है. कोर्ट के मुताबिक, बालिग होने के बाद किसी व्यक्ति की धार्मिक आस्था, रहने की जगह, संबंध और निजी जिंदगी से जुड़े फैसलों में उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता अहम है.

पिता ने दर्ज कराई थी एफआईआर

राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए पिता की ओर से दर्ज एफआईआर का हवाला दिया. एफआईआर में हिंदू धर्म से इस्लाम में कथित जबरन और धोखे से धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया गया था. जांच के दौरान भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अन्य धाराओं के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धाराएं भी जोड़ी गईं.

सरकार ने दावा किया कि धर्म परिवर्तन एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है और महिलाओं को छोड़ने से जांच प्रभावित हो सकती है. हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि एफआईआर की जांच कानून के मुताबिक जारी रहेगी और इस आदेश की टिप्पणियों से जांच प्रभावित नहीं होगी.

यूपी सरकार की भूमिका पर भी उठे सवाल

22 पेज के आदेश में कोर्ट ने राज्य की कार्रवाई पर भी गंभीर टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि महिलाओं की आजादी की रक्षा करने के बजाय सरकारी मशीनरी ने उनकी कथित अवैध हिरासत जारी रहने दी.

इसी वजह से हाईकोर्ट ने इसे संवैधानिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना और  मुआवजे का आदेश दिया. कोर्ट ने पिता और उत्तर प्रदेश सरकार को संयुक्त रूप से 25 लाख रुपये देने का आदेश दिया है. यह रकम दोनों बहनों के बीच बराबर बांटी जाएगी और भुगतान 8 हफ्ते के भीतर करना होगा.