राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कई लोगों पर FIR दर्ज, लिस्ट में अविनाश शुक्ला-मनीष यादव समेत ये नाम शामिल!

अयोध्या राम मंदिर से जुड़े मामले में बड़ी खबर सामने आई है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है.

UP Tak

संतोष शर्मा

25 Jun 2026 (अपडेटेड: 25 Jun 2026, 08:44 PM)

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Ram Mandir Case: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ाए गए चंदे और चढ़ावे की रकम में हुई कथित हेराफेरी के मामले में टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा समेत कई लोगों पर एफआईआर दर्ज हो गई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर पुलिस ने एक चोरी और धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है.

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पुलिस ने जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, उनमें अविनाश शुक्ला, अंकलप मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्र, सुभाष, करुणेश और रमाशंकर यादव (टिन्नू) का नाम शामिल है. ये पूरी कार्रवाई एसआईटी की शुरुआती जांच रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के आधार पर की गई है.

8 लोग नामजद

सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, मामले का पर्दाफाश होते ही पुलिस ने इस सिलसिले में कुल 8 लोगों को हिरासत में ले लिया है. बताया जा रहा है कि जिन भी लोगों के पास से गड़बड़ी की रकम बरामद हुई है, उन सभी को इस मामले में नामजद किया गया है. नामजद आरोपियों में करुणेश पांडे, अविनाश त्रिपाठी, मनीष यादव, लव कुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और सुभाष चंद्र के नाम शामिल हैं, जिनसे फिलहाल पूछताछ की जा रही है. 

शुरुआती जांच के बाद लिया गया एक्शन

मिली जानकारी के मुताबिक, इस मामले में एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर ली थी. जांच में सामने आए तथ्यों और सबूतों को देखते हुए ही इस कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाने की सिफारिश की गई थी.

किसकी शिकायत पर दर्ज हुआ मामला?

एफआईआर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य श्री कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है.

एसआईटी की रिपोर्ट और एफआईआर दर्ज होने के बाद इस मामले में हड़कंप मच गया है. अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस की आगे की जांच में क्या नए खुलासे होते हैं और किन लोगों पर गाज गिरती है.

रिपोर्ट में किसी को क्लीन चिट नहीं

सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी इस प्रारंभिक रिपोर्ट में दान राशि की गणना और उसकी निगरानी व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल उठाए हैं. जांच के दौरान यह पाया गया कि दान गिनने की प्रक्रिया में कई बड़ी खामियां और अनियमितताएं थीं.

एसआईटी ने मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर कड़ा शिकंजा कसा है. जांच टीम ने नोट गिनने वाले कर्मियों के चयन की प्रक्रिया की पूरी पड़ताल की है. एसआईटी ने इन गणना कर्मियों और राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के बीच के कनेक्शन और आपसी संबंधों की गहराई से जांच की है.

इसके साथ ही मंदिर की आंतरिक व्यवस्था और इसके रोजमर्रा के संचालन के लिए जिम्मेदार कुछ रसूखदार पदाधिकारियों की भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा गया है. रिपोर्ट में प्रशासनिक और निगरानी तंत्र की जवाबदेही तय करने की बात कही गई है.
 

एसबीआई और प्राइवेट एजेंसी की लापरवाही

एसआईटी की प्रारंभिक जांच में यह साफ हो गया है कि इस कथित घोटाले की मुख्य वजह देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई और एक निजी एजेंसी की घोर लापरवाही थी. दरअसल, राम मंदिर के चढ़ावे का पूरा बैंकिंग कामकाज एसबीआई के पास था. नोटों को छांटने और गड्डियां बनाने की जिम्मेदारी भी उसी की थी. लेकिन बैंक ने इस अति-संवेदनशील काम का ठेका वाराणसी की एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी को दे दिया.

इस प्राइवेट एजेंसी ने बिना किसी कड़े बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के ट्रस्ट के ही कुछ लोगों की सिफारिश पर अयोध्या के स्थानीय लड़कों को करोड़ों रुपये के कैश की गिनती में लगा दिया, जिससे इस हेराफेरी को अंजाम देना आसान हो गया.

शासन को सौंपी गई गोपनीय रिपोर्ट

लखनऊ के संभागीय आयुक्त विजय विश्वास पंत ने एसआईटी की ओर से ये प्रारंभिक रिपोर्ट एसीएस (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी. रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद अपर मुख्य सचिव (गृह) ने मीडिया से बातचीत से करते हुए कहा 'यह शासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी कमेटी का एक प्रारंभिक प्रतिवेदन यानी इनिशियल रिपोर्ट है. ये एक बेहद गोपनीय जांच है. इसलिए इस समय हम ज्यादा जानकारी साझा नहीं कर सकते. हमारी टीम ने अब तक जो भी तथ्य जुटाए हैं उन्हें सरकार को उपलब्ध करा दिया गया है और आगे की विधिक कार्रवाई पर निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा.'