5 बार असफल होने के बाद भी नहीं मानी हार, छठे प्रयास में UPPCS रैंक-6 पाने वालीं हरदोई की दीप्ति वर्मा ने ऐसे की थी पढ़ाई

Deepti Verma UPPCS Rank 6: UPPCSमें 6वीं रैंक पाने वाली दीप्ति वर्मा की कहानी. पांच बार असफल होने के बाद भी दीप्ति का हौसला नहीं टूटा. लखनऊ में रहकर की तैयारी और तीसरे प्रयास में बनीं अफसर. जानें कैसे दीप्ति ने अपनी जिद्द से हासिल किया मुकाम और क्या थी उनकी जीत की स्ट्रैटजी.

Deepti Verma UPPCS Rank 6

प्रशांत पाठक

30 Mar 2026 (अपडेटेड: 30 Mar 2026, 02:42 PM)

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Deepti Verma UPPCS Rank 6: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का रिजल्ट जारी हो चुका है. साल 2024 की UPPCS टॉपर नेहा पंचाल हैं. वहीं रायबरेली की रहने वाली अनन्या त्रिवेदी ने रैंक 2 हासिल किया है. टॉपरों की इस लिस्ट में एक नाम हरदोई की दीप्ति वर्मा का भी है जिन्होंने छठा रैंक हासिल किया है. दीप्ति का परिवार लंबे समय से लखनऊ के विकास नगर में रह रहा है. एक साधारण परिवार से आने वाली दीप्ति की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए मिसाल है जो एक-दो बार असफल होने के बाद उम्मीद छोड़ देते हैं.

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पढ़ाई में ब्रिलिएंट रहीं हैं दीप्ति वर्मा

दीप्ति शुरू से ही मेधावी छात्रा रही हैं. लखनऊ के सेंट फिदलिस इंटर कॉलेज से हाईस्कूल (90.4%) और इंटर (94.5%) करने के बाद उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी की. दीप्ति बताती हैं कि उन्होंने इंटर के बाद ही तय कर लिया था कि उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाना है. यही सोच उनके लंबे और संघर्षपूर्ण सफर की सबसे बड़ी ताकत बनी. दीप्ति का सफर चुनौतियों से भरा रहा. उनका शुरुआती फोकस यूपीएससी पर था जहां उन्हें एक के बाद एक 5 बार असफलता का सामना करना पड़ा.

पांच बार असफलता के बाद भी नहीं मानी हार

पांच बार असफल होने के बाद भी दीप्ति का हौसला नहीं टूटा. उन्होंने अपनी कमियों को सुधारा और पीसीएस (PCS) परीक्षा पर ध्यान केंद्रित किया. पीसीएस में भी दो बार असफल होने के बाद आखिरकार अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने टॉप-10 में जगह बनाकर अपनी मेहनत को सार्थक किया.

लाइब्रेरी में पढ़ते-पढ़ते सुबह से शाम कर देती थीं दीप्ति

दीप्ति की तैयारी का तरीका बेहद अनुशासित था. वह सुबह से शाम 7 बजे तक लाइब्रेरी में रहकर पढ़ाई करती थीं. सीमित किताबें, नियमित रिवीजन और मॉक टेस्ट उनकी रणनीति का हिस्सा थे. तैयारी के दौरान उनकी मां पूनम वर्मा की तबीयत अक्सर खराब रहती थी जिससे उन पर मानसिक दबाव रहता था. लेकिन उनके पिता देवेंद्र सिंह जो LIC एजेंट हैं और भाई ने उन्हें हर कदम पर संभाला और उनका मनोबल गिरने नहीं दिया. दीप्ति का मानना है कि सफलता के लिए सोशल मीडिया का सीमित उपयोग बहुत जरूरी है. इसकी लत से बचकर ही पढ़ाई पर ध्यान लगाया जा सकता है.वह अपनी सफलता का श्रेय परिवार के अटूट समर्थन को देती हैं. उनका कहना है कि अगर परिवार का भरोसा न होता, तो 5 बार फेल होने के बाद दोबारा खड़ा होना मुश्किल था.