उत्तर प्रदेश पात्रता परीक्षा (UPTET 2026) के पहले दिन की दूसरी पाली (जूनियर लेवल) की परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई है. अमेठी जनपद की बात करें तो यहां कुल 12 केंद्रों पर 23000 से अधिक परीक्षार्थी इस तीन दिवसीय परीक्षा में भाग ले रहे हैं. प्रशासन की ओर से जीजीआईसी समेत सभी केंद्रों पर सुरक्षा और मॉनिटरिंग के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. परीक्षा खत्म होने के बाद जैसे ही अभ्यर्थी केंद्रों से बाहर निकले, यूपी Tak की टीम ने उनसे बातचीत की. पेपर के स्तर और सालों से अटकी जूनियर शिक्षक भर्ती को लेकर छात्रों का दर्द और गुस्सा साफ तौर पर देखने को मिला.
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हिंदी-संस्कृत ने दी राहत, SST के लंबे सवालों ने चकराया सिर
परीक्षा देकर निकले अभ्यर्थियों ने बताया कि कुल 150 नंबर के इस पेपर में अलग-अलग विषयों का स्तर मिला-जुला रहा. सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर और प्रतापगढ़ से आए परीक्षार्थियों ने पेपर का जो रिव्यू दिया, उसकी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
हिंदी और संस्कृत: अधिकांश छात्रों के मुताबिक हिंदी और संस्कृत का पोर्शन काफी आसान (Easy) रहा, जिसने स्कोरिंग में मदद की.
जीएस और मनोविज्ञान (CDP): सामान्य अध्ययन (GS) और चाइल्ड डेवलपमेंट पोर्शन को छात्रों ने 'इजी टू मॉडरेट' यानी सामान्य बताया.
गणित और विज्ञान: मैथ बैकग्राउंड के कुछ छात्रों को गणित का हिस्सा थोड़ा कठिन (Tough) लगा.
सोशल साइंस (SST) ने चौंकाया: सोशल साइंस के अभ्यर्थियों में थोड़ा असंतोष दिखा. सुल्तानपुर की निग रंजुम ने बताया कि UPTET में आमतौर पर सीधे 'फैक्ट्स' (तथ्य) पूछे जाते थे, लेकिन इस बार सीटेट (CTET) की तर्ज पर 5-6 लाइनों वाले लंबे और घुमावदार सवाल पूछे गए, जिसमें समय ज्यादा लगा और इतिहास-पॉलिटी के सीधे सवाल गायब थे.
'सरकार मौसम की तरह है, कब बदल जाए पता नहीं!'
पात्रता परीक्षा में पास होने के लिए 90 नंबर लाना अनिवार्य है और ज्यादातर छात्र 105 से 110 नंबर आने का दावा कर रहे हैं. लेकिन असली दर्द पात्रता के बाद मिलने वाले रोजगार (भर्ती) का है. प्रतापगढ़ से आए छात्र शिवा ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, "आश्वासन तो मिला है कि वैकेंसी आएगी, लेकिन सरकार भी मौसम की तरह है, कब बदल जाए कुछ कहा नहीं जा सकता."
2021 के बाद से सूखा, 50 हजार पद खाली होने का दावा
परीक्षा केंद्र के बाहर खड़े युवाओं ने जूनियर लेवल (कक्षा 6 से 8) की भर्ती न आने पर भारी नाराजगी जताई. छात्रों का कहना है कि प्राइमरी स्कूल की भर्तियों से बीएड (B.Ed) वाले बाहर हो चुके हैं, ऐसे में उनके पास सिर्फ जूनियर की भर्ती का ही सहारा है.
बेरोजगार छात्रों का दावा है कि उत्तर प्रदेश में जूनियर स्कूलों में करीब 50,000 से अधिक पद खाली पड़े हैं. विषयवार शिक्षक और भाषा शिक्षकों (संस्कृत, उर्दू) की भारी कमी है, लेकिन साल 2021 के बाद से सरकार ने कोई बड़ी सीधी भर्ती नहीं निकाली है. छात्रों का कहना है कि वे केवल इसी उम्मीद में हर बार परीक्षा देते हैं कि शायद चुनाव या किसी अन्य मौके पर सरकार विज्ञापन जारी कर दे.
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