Pawan Singh News: भोजपुरी के पावर स्टार पवन सिंह को लेकर इन दिनों सियासी गलियारों में सिर्फ एक ही चर्चा है कि विधान परिषद की कुर्सी मिलने के बाद अब आगे क्या? क्या पवन सिंह सिर्फ एक एमएलसी बनकर रह जाएंगे या फिर उनके हाथ बिहार सरकार की कमान आने वाली है? सूत्रों के हवाले से आ रही बेहद बड़ी खबर के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी 'पावर स्टार' के लिए एक बहुत बड़ा गेम प्लान तैयार कर चुकी है और उन्हें जल्द ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की कैबिनेट में मंत्री पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है. 2024 के लोकसभा चुनाव में काराकाट सीट पर एनडीए को झटका देने वाले पवन सिंह को बीजेपी अब बिहार में राजपूत समाज के एक बड़े चेहरे और यूथ आइकॉन के रूप में प्रमोट करने जा रही है. आइए समझते हैं कि सम्राट कैबिनेट का वो कौन सा गणित है, जो पवन सिंह के मंत्री बनने का रास्ता साफ कर रहा है.
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क्या पवन सिंह के लिए जगह खाली है?
पवन सिंह के मंत्री बनने की चर्चाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिहार कैबिनेट में इसके लिए जगह बची है? आइए इसके कानूनी और संवैधानिक गणित को समझते हैं.
91वां संविधान संशोधन नियम
संविधान के 91वें संशोधन के नियमों के मुताबिक, किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या वहां की विधानसभा की कुल सीटों के 15% से अधिक नहीं हो सकती. बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं. इस लिहाज से 243 का 15% निकालने पर यह आंकड़ा 36.45 बैठता है. यानी बिहार सरकार में मुख्यमंत्री को मिलाकर अधिकतम 36 मंत्री ही बनाए जा सकते हैं.
वर्तमान में सम्राट चौधरी की सरकार में कुल 35 मंत्री काम कर रहे हैं. इस गणित के हिसाब से कैबिनेट में अभी भी 1 मंत्री पद खाली है. कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी इसी खाली कोटे को भरने के लिए पवन सिंह के नाम पर मुहर लगा सकती है. इसके अलावा यदि आने वाले दिनों में किसी मंत्री की छुट्टी होती है या फेरबदल होता है तो मुख्यमंत्री के विशेषाधिकार के तहत पवन सिंह को आसानी से एडजस्ट किया जा सकता है. राजपूत वोट बैंक और पूर्वांचल बेल्ट में पवन का 'जलवा'भारतीय जनता पार्टी का पारंपरिक और कोर वोटर राजपूत समाज माना जाता है. पवन सिंह खुद आरा के रहने वाले हैं और राजपूत समाज से आते हैं. शाहाबाद, आरा, बक्सर से लेकर पूरे बिहार और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल बेल्ट तक पवन सिंह की जबरदस्त लोकप्रियता है.
पिछले कुछ समय से बिहार में राजपूत मतदाताओं के बीच जो थोड़ी-बहुत नाराजगी देखी जा रही है. बीजेपी पवन सिंह को आगे करके उस डैमेज को कंट्रोल करना चाहती है. पवन सिंह के जरिए पार्टी न सिर्फ अपने कोर वोट बैंक को साधेगी बल्कि उनके बड़े फैन बेस के कारण हर तबके के युवा वोटरों को भी अपने पाले में खींचने का माद्दा रखती है.
2025 विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी का 'तुरुप का इक्का' 2025 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी को एक ऐसे कद्दावर और क्राउड पुलर नेता की जरूरत है जो रैलियों में जान फूंक सके. लोकसभा चुनाव के दौरान पवन सिंह जिस भी क्षेत्र में प्रचार के लिए गए वहां का हुजूम देखने लायक था. पवन सिंह की इस राजनीतिक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए वरिष्ठ पत्रकार विनय कुमार बताते हैं कि 'पवन सिंह निर्विरोध बिहार विधान परिषद के सदस्य निर्वाचित हुए हैं. बीजेपी हमेशा नए और ऊर्जावान चेहरों को आगे बढ़ाने के लिए जानी जाती है. पवन सिंह युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं. ऐसे में बीजेपी उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देकर पूरे बिहार में युवाओं और राजपूत समाज के बीच घुमाने का काम करेगी ताकि चुनाव में एनडीए को इसका सीधा माइलेज मिल सके.'
आसनसोल से काराकाट और फिर MLC बनने तक का सफरपवन सिंह का यह सफर बेहद नाटकीय रहा है. साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से टिकट दिया था. लेकिन उन्होंने वहां से लड़ने से इंकार कर दिया. इसके बाद वे निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे और काराकाट सीट पर एनडीए के उपेंद्र कुशवाहा का खेल बिगाड़ दिया. इस झटके के बावजूद शाहाबाद और भोजपुरी बेल्ट में पवन सिंह के रूतबे को देखते हुए बीजेपी ने उन्हें गले लगाना ही बेहतर समझा. पहले उन्हें सांसद का टिकट दिया और अब निर्विरोध एमएलसी बनाकर सदन भेज दिया है. अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और बीजेपी आलाकमान जल्द ही पवन सिंह को मंत्री पद की शपथ दिलाकर बिहार की सियासत में 'पावर स्टार' के एक नए युग की शुरुआत करते हैं या नहीं.
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