Pawan Singh Car: बिहार विधान परिषद यानी MLC चुनाव के लिए नामांकन के आखिरी दिन 8 जून को पटना स्थित विधानसभा परिसर में भारी सियासी गहमागहमी देखने को मिली. नामांकन के अंतिम दिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने एकजुटता दिखाते हुए जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन किया जिसके आगे महागठबंधन खेमे में अपेक्षाकृत सन्नाटा पसरा नजर आया. इस दौरान सबसे ज्यादा लाइमलाइट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे व बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और बीजेपी उम्मीदवार के साथ-साथ भोजपुरी के पावर स्टार पवन सिंह ने बटोरी. दोनों ही दिग्गजों ने दिग्गजों की मौजूदगी में अपने-अपने नामांकन पत्र दाखिल कर दिए हैं.
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करोड़ों की लग्जरी कार से पहुंचे पवन सिंह
विधानसभा परिसर में आज सबसे ज्यादा चर्चा भोजपुरी सुपरस्टार और बीजेपी नेता पवन सिंह की एंट्री को लेकर रही. पवन सिंह करीब ₹2.5 करोड़ की कीमत वाली अपनी आलीशान लग्जरी गाड़ी टोयोटा लैंड क्रूजर से विधानसभा पहुंचे. उन्हें देखने के लिए समर्थकों, प्रशंसकों और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. इस खास मौके पर पवन सिंह के साथ उनके बड़े भाई गुड्डू सिंह भी मौजूद रहे. पवन सिंह के आते ही परिसर 'पावर स्टार' के नारों से गूंज उठा.
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने भी दाखिल किया नामांकन
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार भी आज पूरे लाव-लश्कर के साथ विधानसभा पहुंचे. उन्होंने विधान परिषद सदस्य के रूप में बेहद सादगी और गंभीरता के साथ अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. निशांत कुमार और पवन सिंह के इस नामांकन ने राजनीतिक गलियारों का ध्यान पूरी तरह अपनी ओर खींच लिया है.
NDA के दिग्गज नेताओं का जुटा महाकुंभ
नामांकन के आखिरी दिन एनडीए खेमे का जोश सातवें आसमान पर दिखाई दिया. उम्मीदवारों का हौसला बढ़ाने के लिए बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह, और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान समेत बिहार सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और एनडीए के शीर्ष नेता विधानसभा परिसर में डटे रहे. एनडीए के कुल 9 उम्मीदवारों में से कुछ ने पहले ही पर्चा भर दिया था. जबकि बाकी बचे प्रत्याशियों ने आज शुभ मुहूर्त में अपना नामांकन पूरा किया.
महागठबंधन में पसरा सन्नाटा
जहां एक तरफ एनडीए खेमे में मंत्रियों और कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ा हुआ था. वहीं विपक्षी महागठबंधन की ओर से वैसी हलचल देखने को नहीं मिली और वहां अपेक्षाकृत सन्नाटा पसरा रहा. संख्या बल के हिसाब से एनडीए के उम्मीदवारों की जीत तय मानी जा रही है. नामांकन की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अब सभी राजनीतिक दलों की नजरें धुआंधार चुनाव प्रचार और आगामी 18 जून को होने वाले मतदान पर टिक गई हैं. यह चुनाव न सिर्फ विधान परिषद की सीटें तय करेगा बल्कि आने वाले समय में बिहार की सियासत और गठबंधनों की जमीनी ताकत का एक बड़ा संदेश भी देगा.
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