गाजियाबाद डीएम ने अपनी जेब से दिए 22000 रुपये, रोते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची थी ये महिला

गाजियाबाद में जनसुनवाई के दौरान एक 70 वर्षीय विधवा महिला ने पेंशन और आयुष्मान कार्ड से जुड़ी समस्याएं जिलाधिकारी के सामने रखीं. महिला की आर्थिक स्थिति जानने के बाद डीएम रविन्द्र कुमार मांदड़ ने अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, आयुष्मान कार्ड की प्रक्रिया शुरू कराई और अपनी परीक्षा ड्यूटी के मानदेय से 22 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी दी.

UP Tak

मयंक गौड़

• 03:49 PM • 12 Jun 2026

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गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश: कलेक्ट्रेट में होने वाली आम जनसुनवाई में यूं तो रोज सैकड़ों फरियादी अपनी समस्याएं लेकर आते हैं, लेकिन गुरुवार को यहां कुछ अलग हुआ. अपनी परेशानियों से टूट चुकी एक 70 साल की बुजुर्ग महिला जब गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ के सामने पहुंची, तो डीएम ने न सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर उनकी मदद की, बल्कि इंसानियत की एक मिसाल भी पेश की.

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बुजुर्ग महिला की आपबीती सुन भावुक हुए डीएम

वसुंधरा (सेक्टर-3) की रहने वाली 70 वर्षीय सत्या शर्मा आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं. उन्होंने रोते हुए जिलाधिकारी को बताया कि लंबे समय से उनकी विधवा पेंशन बंद है और उनका आयुष्मान कार्ड भी नहीं बन पा रहा है, जिससे उन्हें इलाज और गुजारे में भारी दिक्कत हो रही है.

बुजुर्ग महिला के आंसू और उनकी लाचारी देखकर डीएम रविन्द्र कुमार मांदड़ का दिल पसीज गया. उन्होंने बिना देरी किए मौके पर मौजूद अधिकारियों को डांट पिलाई और तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए.

अपनी जेब से दिए 22,000 रुपये

डीएम के निर्देश पर कलेक्ट्रेट में ही बुजुर्ग महिला के आयुष्मान कार्ड की प्रक्रिया तुरंत शुरू कराई गई. साथ ही, उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगामी जुलाई महीने से उनकी रुकी हुई विधवा पेंशन दोबारा चालू हो जाएगी.

बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं हुई. महिला को तुरंत आर्थिक राहत पहुंचाने के लिए डीएम ने एक ऐसा कदम उठाया जिसकी वहां मौजूद हर व्यक्ति तारीफ कर रहा है. डीएम रविन्द्र कुमार मांदड़ ने हाल ही में अपनी परीक्षा ड्यूटी से मिले मानदेय के 22 हजार रुपये अपनी जेब से निकाले और बुजुर्ग महिला के हाथ में सौंप दिए.

कलेक्ट्रेट में मौजूद लोगों की आंखें हुईं नम

अचानक मिली इस बड़ी मदद से बुजुर्ग महिला भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. जनसुनवाई में मौजूद अन्य लोगों और अधिकारियों ने भी जिलाधिकारी की इस संवेदनशीलता और बड़े दिल की खुलकर सराहना की. लोगों का कहना था कि कड़क प्रशासनिक अफसरों के बीच ऐसा मानवीय और दयालु चेहरा बहुत कम देखने को मिलता है.

गरीब, बेसहारा और जरूरतमंद लोगों को न्याय और सही समय पर सहायता दिलाना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है. जिले के किसी भी पात्र व्यक्ति को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उनके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.

 

- रविन्द्र कुमार मांदड़, जिलाधिकारी, गाजियाबाद

इस भावुक कर देने वाले पल के दौरान कलेक्ट्रेट में मुख्य विकास अधिकारी और अपर जिलाधिकारी सहित जिले के तमाम बड़े अधिकारी मौजूद थे. डीएम के इस कदम ने यह साबित कर दिया कि नियम-कानूनों को निभाने के साथ-साथ अफसरों के दिल में जनता के लिए दर्द होना कितना जरूरी है.