कोई पछतावा नहीं फिर हत्या करूंगा... आरोपी अमजद खान की बातों को सुनकर जज ने तुरंत दे दी फांसी की सजा, सगे भांजे की थी हत्या

Ghazipur Crime News: गाजीपुर में 4 साल के मासूम भांजे की बेरहमी से हत्या करने वाले अमजद खान को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई. जज के सामने भी आरोपी ने कोई पछतावा नहीं जताया. कोर्ट ने मामले को दुर्लभतम से दुर्लभ मानते हुए सख्त फैसला सुनाया.

amjad khan

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विनय कुमार सिंह

• 12:41 PM • 12 Jun 2026

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Ghazipur Crime News: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से एक खौफनाक खबर सामने आई है. यहां एक अदालत में न्याय की कुर्सी पर बैठे जज के सामने अमजद खान नाम का एक ऐसा हत्यारा आया जिसकी बातों को सुनकर हर कोई सन्न रह गया. एक ऐसा आरोपी जिसने करीब 5 साल पहले खुद अपने हाथों से अपने सगे मासूम भांजे की हत्या कर दी थी. इस मामले में सजा सुनाने से ठीक पहले न्यायाधीश ने जब कातिल से पूछा कि क्या तुम्हें अपने किए पर कोई पछतावा है?' 

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इस पर कटघरे में खड़े अमजद खान की आंखों में न तो आंसू थे और न ही चेहरे पर कोई शिकन. उसने जज की आंखों में आंखें डालकर बेहद ठंडे लहजे में कहा 'मुझे कोई पछतावा नहीं है और अगर मुझे छोड़ा गया तो जो भी मेरे आड़े आएगा उसे मैं जान से मार दूंगा.' कोर्ट रूम में गूंजे इन खौफनाक अल्फाजों ने जज के दिल को भी झकझोर दिया. आरोपी के इसी खूंखार रवैये को देखते हुए अदालत ने इसे इतिहास का दुर्लभतम से दुर्लभ (Rarest of Rare) अपराध माना और जज ने कातिल अमजद खान को तब तक फांसी पर लटकाने का हुक्म दे दिया जब तक उसका दम न निकल जाए. 

ननिहाल में काल बनकर बैठा था सगा मामा

यह खौफनाक दास्तान शुरू होती है 21 अक्टूबर 2021 को गाजीपुर के गहमर कोतवाली थाना क्षेत्र के बारा गांव से. दिलदारनगर के मिर्चा गांव का रहने वाला महज 4 साल का मासूम दानियाल खान अपनी मां शबाना नाज के साथ अपने ननिहाल आया था. मासूम दानियाल को क्या मालूम था कि जिसे वह प्यार से मामा कहता है वही उसके लिए कंस बन चुका है. एक मामूली से घरेलू विवाद के चलते मामा अमजद खान के सिर पर खून सवार हो गया. उसने तड़पते हुए अपने ही 4 साल के सगे भांजे दानियाल की धारदार हथियार से बेहद बेरहमी के साथ गला रेतकर हत्या कर दी. इस कत्ल के बाद पूरे इलाके में कोहराम मच गया था और मृतक के चाचा अरबाज खान ने गहमर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था.

अपनों की गवाही ने कातिल को पहुंचाया अंजाम तक

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) शक्ति सिंह की अदालत में इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस की सुनवाई चल रही थी. सरकारी वकील यानी एडीजीसी क्रिमिनल अखिलेश सिंह ने कोर्ट के सामने ऐसी दलीलें और सबूत पेश किए कि कातिल का बचना नामुमकिन हो गया. इस केस में कुल 9 गवाहों की गवाही बेहद अहम रही. सबसे बड़ी बात यह रही कि कातिल अमजद को सजा दिलाने के लिए उसके अपने ही परिवार ने अदालत में सच का साथ दिया. कत्ल की चश्मदीद और मृत मासूम की मां शबाना नाज उसकी बहनें गुलशन आरा और जूही तथा खुद आरोपी के सगे भाई आसिफ खान ने अदालत में अमजद के खिलाफ गवाही दी.

जज के सामने जब कातिल ने कही खौफनाक बात

तमाम गवाहों और सबूतों के आधार पर अदालत ने अमजद खान को हत्या का दोषी करार दे दिया. लेकिन असली ड्रामैटिक और रोंगटे खड़े कर देने वाला मोड़ तब आया जब सजा तय करने के बिंदु पर बहस चल रही थी. न्यायाधीश शक्ति सिंह ने अमजद से पूछा कि अगर उसे छोड़ दिया जाए तो वह क्या करेगा? अमजद ने जिस बेरहमी से जवाब दिया कि 'वह आगे भी कत्ल करेगा और जो सामने आएगा उसे मार देगा.' उसने यह साबित कर दिया कि वह समाज के लिए एक खूंखार खतरा बन चुका है. उसके भीतर पछतावे का एक कतरा भी नहीं था.

'जब तक मौत न हो, लटकाए रखो'

अमजद के इस बेहद अड़ियल, क्रूर और डरावने रवैये को देखने के बाद न्यायाधीश शक्ति सिंह ने तल्ख टिप्पणी करते हुए इसे दुर्लभतम से दुर्लभ मामला घोषित किया. कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि 'मुजरिम अमजद खान को फांसी के फंदे पर तब तक लटका कर रखा जाए, जब तक कि उसकी मृत्यु न हो जाए.' इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया और आदेश दिया कि यह पूरी राशि रोती-बिलखती पीड़ित मां को दी जाएगी. फैसला मुकम्मल होते ही जज साहब ने अपनी फाउंटेन पेन की निब तोड़ दी ताकि इस कलम से दोबारा ऐसा कोई भयानक कत्ल न लिखा जा सके.

अमजद खान पहुंचा जेल

इस फैसले की पुष्टि खुद एडीजीसी क्रिमिनल अखिलेश सिंह ने बाइट देकर की है. कोर्ट का हुक्म आते ही पुलिस ने अमजद खान को चारों तरफ से घेर लिया. भारी सुरक्षा के बीच, हाथों में लोहे की हथकड़ियां और पैरों में बेड़ियां जकड़कर मुजरिम को पुलिस वैन में बैठाया गया और सीधे जेल के उस ब्लैक आउट बैरक में भेज दिया गया जहां अब सिर्फ उसकी मौत का फंदा उसका इंतजार कर रहा है.