UP Teacher Protest: उत्तर प्रदेश में शिक्षकों को उनके शैक्षणिक कार्यों से हटाकर भूसा इकट्ठा करने जैसे गैर-शैक्षिक कार्यों में लगाए जाने का मामला सामने आने के बाद विवाद गहरा गया है. इस आदेश को लेकर शिक्षक समुदाय में असंतोष बढ़ गया है, क्योंकि उनका मानना है कि उनका मुख्य दायित्व बच्चों को शिक्षा देना है, न कि इस तरह के कार्यों में शामिल होना. कई शिक्षकों ने कहा है कि भीषण गर्मी में घर-घर जाकर भूसा एकत्र करना उनके मूल कर्तव्यों से उन्हें दूर कर रहा है, जिससे उनकी गरिमा और कार्यक्षमता दोनों प्रभावित हो रही हैं.
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इस फैसले के खिलाफ शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है और इसे अनुचित बताते हुए इसे तानाशाही जैसा कदम करार दिया है. उनका कहना है कि शिक्षकों का प्राथमिक उद्देश्य शिक्षा देना है और उन्हें केवल शैक्षणिक कार्यों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए. शिक्षकों का यह भी कहना है कि इस तरह के कार्य गौशालाओं, कृषि विभाग या ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराए जा सकते हैं, ताकि शिक्षकों को उनके वास्तविक दायित्वों से भटकना न पड़े. कई जिलों में इस आदेश के लागू होने से शिक्षकों के बीच तनाव की स्थिति भी देखने को मिल रही है और विरोध की आवाजें तेज हो गई हैं.
शिक्षक संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे जनगणना जैसे राष्ट्रीय कार्यों में सहयोग करते रहे हैं, लेकिन लगातार गैर-शैक्षिक जिम्मेदारियां देना उचित नहीं है. उनका कहना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है और शिक्षक अपने वास्तविक कार्य पर पूरी तरह ध्यान नहीं दे पाते. इसी कारण उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस आदेश पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो वे आंदोलन और धरना-प्रदर्शन जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे. उनका उद्देश्य केवल इतना है कि शिक्षकों की गरिमा बनी रहे और उन्हें केवल शिक्षा के क्षेत्र में ही कार्य करने दिया जाए.
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