UP Kukut Palan Karj Yojana: अगर आप नौकरी छोड़कर खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, लेकिन पूंजी की कमी आपको रोक रही है, तो उत्तर प्रदेश कुकुट पालन कर्ज योजना आपके लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकती है. राज्य सरकार की इस योजना के जरिए युवाओं, किसानों और पशुपालकों को पोल्ट्री फार्म यानी मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता और बैंक ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है. योजना का मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना, लोगों की आय बढ़ाना और प्रदेश में अंडा उत्पादन को मजबूत करना है. इस योजना का लाभ लेकर कई लोग अब गांव में ही रोजगार पा रहे हैं और परिवार के साथ रहकर अच्छी कमाई कर रहे हैं.
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क्या है उत्तर प्रदेश कुकुट पालन कर्ज योजना?
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू कुकुट विकास नीति के तहत यह योजना चलाई जा रही है. इसमें इच्छुक लोग 10 हजार या उससे अधिक क्षमता वाले पोल्ट्री फार्म स्थापित कर सकते हैं. जानकारी के अनुसार, 10 हजार मुर्गियों के फार्म को स्थापित करने में लगभग 99.53 लाख रुपये का खर्च आता है. इसमें से करीब 70 लाख रुपये तक का बैंक लोन उपलब्ध कराया जाता है, जबकि शेष राशि लाभार्थी को स्वयं निवेश करनी होती है.
योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि लोन पर लगने वाले 7 प्रतिशत तक ब्याज का भुगतान सरकार करती है. यदि ब्याज दर इससे अधिक होती है, तो अतिरिक्त रकम लाभार्थी को खुद जमा करनी होती है. इसके अलावा यदि किसी व्यक्ति के पास जमीन नहीं है और वह जमीन खरीदकर पोल्ट्री फार्म शुरू करना चाहता है, तो जमीन खरीदने पर लगने वाले स्टांप शुल्क का खर्च पशुपालन विभाग द्वारा वहन किया जाता है.
योजना का लाभ लेने के लिए क्या है पात्रता?
योजना का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं. आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए. उसके पास कम से कम एक से तीन एकड़ तक जमीन, आधार कार्ड, बैंक में बचत खाता और जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज होना जरूरी है. इन मानकों को पूरा करने वाले किसान, पशुपालक और युवा इस योजना में आवेदन कर सकते हैं.
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
योजना में आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को पहचान प्रमाण पत्र के रूप में ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड या पासपोर्ट देना होगा. इसके अलावा पासपोर्ट साइज फोटो, पते का प्रमाण (राशन कार्ड, बिजली बिल, पानी बिल, टेलीफोन बिल या लीज एग्रीमेंट), बैंक स्टेटमेंट की फोटोकॉपी, जमानतदार और प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी जरूरी होगी. प्रोजेक्ट रिपोर्ट में व्यवसाय की पूरी रूपरेखा और लागत का विवरण देना होगा.
पोल्ट्री फार्म शुरू करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
पोल्ट्री फार्म स्थापित करने के लिए कुछ बुनियादी सुविधाओं का होना जरूरी है. लाभार्थी के पास मुर्गी पालन शेड, दाना-पानी के बर्तन, बेहतर नस्ल के चूजे या मुर्गियां, टीकाकरण और दवा की सुविधा, अंडा रखने के बॉक्स, बिजली और रोशनी की व्यवस्था तथा उत्पाद बेचने के लिए बाजार होना चाहिए.
विशेषज्ञों के मुताबिक, मुर्गी घर को ऊंची सतह पर बनाना बेहतर माना जाता है, ताकि बारिश और जलभराव की समस्या से बचा जा सके. शेड को फूस, घास या मजबूत छप्पर से ढकना चाहिए और फर्श को जमीन से करीब 10 इंच ऊंचा व मजबूत बनाना चाहिए ताकि सांप या चूहे जैसी समस्याओं से सुरक्षा मिल सके. साथ ही शेड की दीवारें मजबूत और हवादार होनी चाहिए.
कैसे करें आवेदन?
यदि कोई किसान, पशुपालक या युवा इस योजना का लाभ लेना चाहता है, तो उसे अपने जिले के विकास भवन स्थित पशुपालन विभाग कार्यालय में जाकर आवेदन करना होगा. वहां मौजूद पशु चिकित्सा अधिकारी और विभागीय कर्मचारी योजना से जुड़ी पूरी जानकारी देने के साथ आवेदन प्रक्रिया में भी मदद करेंगे. इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट भी देखी जा सकती है.
फतेहपुर के अवधेश सिंह की बदली जिंदगी
इस योजना का लाभ उठाकर फतेहपुर निवासी अवधेश सिंह ने अपनी जिंदगी में बड़ा बदलाव देखा है. अवधेश सिंह बताते हैं कि पहले उन्हें काम की तलाश में घर से बाहर जाना पड़ता था, जिसके कारण परिवार से दूर रहना पड़ता था. लेकिन अब पोल्ट्री फार्म की वजह से उन्हें गांव में ही रोजगार मिल गया है.
अवधेश सिंह के मुताबिक, उनकी इकाई में करीब 200 कर्मचारी काम कर रहे हैं, जिन्हें समय पर वेतन और जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं. उन्होंने कहा कि इस योजना ने न केवल उन्हें बल्कि आसपास के कई लोगों को भी रोजगार दिया है. अवधेश सिंह ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए कहा कि इस योजना ने ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है.
क्या बोले मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी?
फतेहपुर के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ वेद ब्रत गंगवार ने बताया कि उत्तर प्रदेश कुकुट विकास नीति 2013 के तहत पात्र किसानों और पशुपालकों के आवेदन निदेशालय भेजे जाते हैं. उन्होंने जानकारी दी कि फिलहाल जिले और प्रदेश में 3 हजार क्षमता वाले 13 पोल्ट्री फार्म और 10 हजार क्षमता वाले 2 बड़े फार्म संचालित हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि अंडा मानव शरीर के लिए प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन प्रदेश अभी भी अंडों की पूरी मांग पूरी नहीं कर पा रहा है. इसी वजह से दक्षिण भारत के राज्यों से अंडे मंगाने पड़ते हैं. ऐसे में कुकुट पालन योजना के जरिए न केवल रोजगार बढ़ रहा है, बल्कि प्रदेश में अंडा उत्पादन और आपूर्ति भी मजबूत हो रही है.
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