महाराजगंज में क्या डीजल-पेट्रोल के लिए मांगे जा रहे हैं कागज? वायरल वीडियो से फैली अफरा-तफरी

Maharajganj Fuel Crisis: महाराजगंज में डीजल-पेट्रोल को लेकर अफवाहों और सख्ती के बीच स्थिति चर्चा में है. नेपाल बॉर्डर इलाके में तस्करी रोकने के लिए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है और फ्लाइंग स्क्वॉड टीम बनाई है.

यूपी तक

29 May 2026 (अपडेटेड: 29 May 2026, 04:14 PM)

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Maharajganj Fuel Crisis: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र के महाराजगंज जिले से डीजल और पेट्रोल को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद माहौल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. महाराजगंज, जो नेपाल बॉर्डर से सटा इलाका है, वहां डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता और सप्लाई को लेकर लोगों में भ्रम और चिंता का माहौल देखा जा रहा है. कुछ जगहों पर लोगों को डब्बा लेकर लंबी कतारों में खड़े देखा गया, जिससे स्थिति और भी चर्चा में आ गई है.

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बॉर्डर इलाके में तस्करी रोकने के लिए प्रशासन की कार्रवाई

प्रशासन और पुलिस की ओर से साफ किया गया है कि डीजल-पेट्रोल की कोई कमी नहीं है, लेकिन बॉर्डर क्षेत्रों में तस्करी और अवैध स्टॉकिंग को रोकने के लिए सख्ती बढ़ाई गई है. अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल सीमा से सटे इलाकों में डीजल की अवैध तस्करी की आशंका को देखते हुए आधार कार्ड जांच और निगरानी व्यवस्था कड़ी की गई है. इसके लिए सप्लाई विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम बनाई गई है, जो पेट्रोल पंपों पर लगातार निगरानी कर रही है.

अवैध स्टॉकिंग और कालाबाजारी पर कार्रवाई

जिलाधिकारी के अनुसार, जिले में डीजल-पेट्रोल की कोई कमी नहीं है, लेकिन कुछ स्थानों पर अवैध रूप से तेल स्टॉक करने और तस्करी की शिकायतें सामने आई थीं. इसी के चलते प्रशासन ने फ्लाइंग स्क्वॉड टीम गठित की है, जो 24 घंटे पेट्रोल पंपों और सप्लाई चेन की निगरानी कर रही है. हाल ही में एक मामले में करीब 170 लीटर डीजल के साथ एक व्यक्ति पर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कार्रवाई भी की गई है. प्रशासन ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अवैध भंडारण और कालाबाजारी करने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जाए.

पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें

हालांकि प्रशासन की ओर से स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट में कुछ अलग तस्वीर सामने आई है. कई पेट्रोल पंपों पर ग्रामीण डीजल के इंतजार में डब्बे लेकर कतारों में खड़े नजर आए. कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि पंप पर कई बार “डीजल नहीं है” का बोर्ड भी लगा रहता है. किसानों का कहना है कि उन्हें खेती और पंपिंग सेट चलाने के लिए डीजल की जरूरत होती है, इसलिए वे किसी भी हाल में इंतजार करने को मजबूर हैं.

प्रशासन का दावा बनाम ग्राउंड रियलिटी

प्रशासन जहां लगातार यह दावा कर रहा है कि सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं है, वहीं सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने स्थिति को और चर्चा में ला दिया है. कुछ वीडियो में पुलिस और अधिकारी लोगों को कागज जांचते और सख्ती बरतते नजर आ रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें जरूरत के समय ईंधन मिलने में दिक्कत हो रही है. इसी को लेकर इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं और बहसें तेज हो गई हैं.

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