Gargi Patel Attack Case: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से सामने आई एक मारपीट की घटना ने न सिर्फ पूर्वांचल बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी हलचल मचा दी है. समाजवादी पार्टी महिला सभा की जिलाध्यक्ष गार्गी पटेल के साथ उनके ही घर में घुसकर कथित तौर पर मारपीट किए जाने का मामला अब सियासी रंग ले चुका है. घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद महिला सुरक्षा, पिछड़ों की राजनीति और समाजवादी पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को लेकर सवाल उठने लगे हैं. मामला इतना तूल पकड़ चुका है कि इसकी गूंज लखनऊ तक सुनाई दी और विपक्षी दलों ने सपा नेतृत्व को निशाने पर लेना शुरू कर दिया.
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क्या है पूरा मामला?
यह मामला चंदौली के मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के मड़िया गांव का बताया जा रहा है. वायरल सीसीटीवी फुटेज में कुछ लोग एक महिला के साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में दो महिलाएं और दो युवक कथित तौर पर महिला को पीटते नजर आ रहे हैं, जबकि एक बुजुर्ग व्यक्ति बीच-बचाव करता दिखाई देता है. जिस महिला के साथ मारपीट हो रही है, उनकी पहचान समाजवादी पार्टी महिला सभा चंदौली की जिलाध्यक्ष गार्गी पटेल के रूप में हुई है.
वहीं सफेद कुर्ता पहने जो व्यक्ति बीच-बचाव करते दिखाई दे रहे हैं, उनका नाम प्यारेलाल यादव बताया जा रहा है. वह समाजवादी पार्टी से जुड़े नेता और वाराणसी के काशी विद्यापीठ ब्लॉक के पूर्व ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं. आरोप प्यारेलाल यादव के परिवार पर लगाए गए हैं.
प्रॉपर्टी डीलिंग से शुरू हुआ विवाद?
जानकारी के मुताबिक गार्गी पटेल और प्यारेलाल यादव के बीच जमीन और प्रॉपर्टी डीलिंग को लेकर बातचीत और मुलाकात होती रहती थी. बताया जा रहा है कि गुरुवार को प्यारेलाल यादव किसी जमीन के रास्ते से जुड़े मामले में बातचीत करने गार्गी पटेल के घर पहुंचे थे. इसी दौरान कथित तौर पर उनके पीछे-पीछे उनकी पत्नी, बेटा और बेटी भी मौके पर पहुंच गए.
घर के अंदर किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते हिंसक विवाद में बदल गई. आरोप है कि प्यारेलाल यादव के परिजनों ने गार्गी पटेल और उनकी बेटियों के साथ अभद्रता की और बाद में मारपीट शुरू कर दी. घटना में घायल गार्गी पटेल को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया.
गार्गी पटेल ने क्या लगाए आरोप?
मारपीट के बाद गार्गी पटेल ने इसे अपने खिलाफ एक सुनियोजित साजिश बताया है. उनका कहना है कि सुबह उनके बिजनेस पार्टनर और “प्यारे मामा” कहे जाने वाले प्यारेलाल यादव का फोन आया था. जमीन से जुड़े एक रास्ते के मामले में बातचीत करने की बात कही गई थी.
गार्गी के मुताबिक, जब वह तैयार हो रही थीं तभी घर की घंटी लगातार बजाई जाने लगी और गेट पीटा गया. उनकी छोटी बेटी ने गेट खोला तो कुछ लोग घर के अंदर घुस आए और बच्चों से बहस करने लगे. उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों को पीटा गया और जब वह बचाने पहुंचीं तो उनके साथ लात-घूसों से मारपीट की गई. आरोप है कि उनके बाल पकड़कर घसीटा गया और घर में मौजूद टेबल तक से हमला किया गया. गार्गी पटेल का दावा है कि टेबल टूटने के बाद लोहे की रॉड जैसी चीज से भी उन्हें मारा गया.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्यारेलाल यादव की पत्नी, दोनों बेटे और बेटी इस हमले में शामिल थे. गार्गी पटेल ने दावा किया कि जमीन के कारोबार में उनका पैसा लगा हुआ था और कुछ लोग कथित रूप से उनकी रकम हड़पने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने कुछ राजनीतिक लोगों पर परिवार में भ्रम फैलाने और साजिश रचने का आरोप भी लगाया.
वीडियो वायरल होने के बाद सियासत तेज
घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर जमकर प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. मामला जल्द ही राजनीतिक बहस का विषय बन गया. सुभासपा प्रमुख और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर हमला बोला.
राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी का PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का नारा सिर्फ दिखावा है. उन्होंने कहा कि पार्टी में गैर-यादव पिछड़ों और महिलाओं के सम्मान की कोई जगह नहीं है. उन्होंने अखिलेश यादव से सवाल पूछते हुए कहा कि जब उनकी अपनी पार्टी की पिछड़ा वर्ग से जुड़ी महिला जिलाध्यक्ष सुरक्षित नहीं हैं, तब सामाजिक न्याय की बात करना कैसे उचित है.
राजभर ने अपने पोस्ट में दावा किया कि गार्गी पटेल के साथ कथित तौर पर बाल पकड़कर घसीटा गया, लात-घूसों से पीटा गया और टेबल से हमला किया गया, लेकिन पार्टी नेतृत्व चुप रहा. उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे द्रौपदी के अपमान के समय लोग चुप बैठे थे, वैसी ही स्थिति समाजवादी पार्टी में देखने को मिल रही है.
सपा नेताओं का पलटवार
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के कई नेताओं ने ओम प्रकाश राजभर के बयान पर आपत्ति जताई और इसे राजनीतिक हमला करार दिया. बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में राजभर लगातार अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर विभिन्न मुद्दों को लेकर हमलावर रहे हैं.
पुलिस जांच में क्या सामने आया?
पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों के अनुसार, घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़िता को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया. पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कारोबारी विवाद का एंगल सामने आया है.
पुलिस के मुताबिक पीड़िता की तहरीर के आधार पर कुल पांच लोगों को नामजद किया गया है. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपित पक्ष वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र के सूजाबाद गांव से जुड़ा है. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और मारपीट किस परिस्थिति में हुई. अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से गहराई से जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना मामला
फिलहाल पुलिस जांच जारी है, लेकिन इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है. एक तरफ महिला सुरक्षा और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी ओर पिछड़ों की राजनीति और दलों के अंदरूनी समीकरणों को लेकर भी बहस तेज हो गई है. अब सबकी नजर पुलिस जांच और आने वाली राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर टिकी हुई है.
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