राम मंदिर कथित चढ़ावा विवाद में SBI की बड़ी अनदेखी? नकदी गिनने का काम निजी एजेंसी को सौंपा... SIT जांच में खुली लापरवाही की परतें!

Ram Mandir Donation Controversy: राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. जानकारी के अनुसार जांच में यह पाया गया है कि राम मंदिर में दान के पैसों की सुरक्षा को लेकर हर स्तर पर गंभीर लापरवाही बरती गई है.

यूपी तक

• 04:54 PM • 22 Jun 2026

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Ram Mandir Donation Controversy: राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की तफ्तीश में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. जानकारी के अनुसार जांच में यह बताया गया है कि राम मंदिर में दान के पैसों की सुरक्षा को लेकर हर स्तर पर लापरवाही बरती गई है. दान पेटी को मंदिर परिसर से उठाकर ट्रस्ट के कमरे तक ले जाने और वहां से नोटों को गिनकर बैंक में जमा करने तक सुरक्षा नियमों की अनदेखी की गई है. इस पूरे मामले में सबसे बड़ी लापरवाही स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के स्तर पर देखने को मिली है, जिसे ट्रस्ट की रकम से जुड़े बैंकिंग कामकाज की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

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सिफारिशों के आधार पर हुई नियुक्तियों

एसबीआई (SBI) का मुख्य काम नोटों को छटवाना, गड्डियां बनवाना और गिनती करवाना था. लेकिन बैंक ने इस बेहद संवेदनशील और जिम्मेदारी वाले काम को खुद करने के बजाय वाराणसी की एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी को ठेके पर दे दिया. इस एजेंसी ने आगे चलकर बिना किसी कड़े बैकग्राउंड वेरिफिकेशन या सुरक्षा जांच के राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों की सिफारिशों पर अयोध्या के स्थानीय लड़कों को काम पर रख लिया. इसी ढीली व्यवस्था और जान-पहचान का फायदा उठाकर अनुकल्प मिश्रा नाम के एक शख्स ने अपने साले लवकुश मिश्रा को भी वहां नौकरी पर लगवा दिया. इसी तरह कई अन्य लोग भी बिना सख्त जांच-पड़ताल के इस अति-संवेदनशील काम का हिस्सा बन गए.

चेकिंग और ड्रेस कोड के नियमों की उड़ी धज्जियां

जहां इतने बड़े पैमाने पर पैसों की गिनती हो रही थी, वहां सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता होनी चाहिए थी, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट थी. ड्यूटी पर आने और जाने के दौरान कर्मचारियों की अनिवार्य चेकिंग (Frisking) में भारी लापरवाही बरती गई. कोई कर्मचारी अंदर क्या ला रहा है या बाहर क्या ले जा रहा है, इसकी ठीक से जांच करने वाला कोई नहीं था. इसके अलावा, नोट गिनने वाले कर्मचारियों के लिए बाकायदा एक ड्रेस कोड तय किया गया था और उन्हें ड्रेस दी गई थी ताकि कोई कपड़ों में पैसे छिपाकर न ले जा सके. हालांकि, कर्मचारी अपने साधारण घरेलू कपड़ों में ही बैठकर बेखौफ नोट गिनते थे और मैनेजमेंट की तरफ से भी इस नियम को लागू करवाने की कोई कोशिश नहीं की गई.

CCTV निगरानी में भी हुई बड़ी चूक

सुरक्षा में लापरवाही का आलम सिर्फ भौतिक चेकिंग तक ही सीमित नहीं था, बल्कि सीसीटीवी (CCTV) की निगरानी में भी भारी ढिलाई बरती गई. जिस कमरे में नोटों की गिनती का काम होता था, वहां सीसीटीवी कैमरे तो लगे थे, लेकिन उनकी फुटेज की लाइव मॉनिटरिंग और निगरानी करने में कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई. सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी जांच में पूरी तरह से यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर शुरुआत से ही नियमों का सख्ती से पालन किया गया होता और निजी सिफारिशों की बजाय सुरक्षा के कड़े इंतजाम रखे गए होते, तो दान के पैसों की चोरी की इस घटना को अंजाम नहीं दिया जा सकता था.