सिविल सेवा रिजल्ट में 301वीं रैंक यूपी या बिहार की किस आकांक्षा सिंह को मिली? अब पता चल गया

UP News: यूपीएससी सिविल सेवा रिजल्ट में रैंक 301 को लेकर मामला साफ हो गया है. अब भारत सरकार के पीआईबी ने बता दिया है कि ये रैंक किस आकांक्षा सिंह को मिली है.

UP News (काली शर्ट पहनीं गाजीपुर की आकांक्षा सिंह को 301वीं रैंक मिली है)

यूपी तक

09 Mar 2026 (अपडेटेड: 09 Mar 2026, 07:16 PM)

follow google news

UP News: UPSC सिविल सेवा का रिजल्ट सामने आने के बाद रैंक 301 को लेकर विवाद हो गया था. दरअसल बिहार की रहने वाली आकांक्षा सिंह और यूपी की रहने वाली आकांक्षा सिंह ने इसको लेकर अपना-अपना देवा पेश कर दिया था. दोनों का कहना था कि ये रैंक उन्होंने हासिल की है. दोनों का एक ही रोल नंबर था और नाम भी एक ही था. 2 लड़कियों की दावेदारी के बाद ये मामला काफी चर्चाओं में रहा था. मगर अब भारत सरकार के पीआईबी ने बता दिया है कि असल में रैंक 301 किसको मिली है. इसी के साथ ये भी साफ हो गया है कि दोनों में से किस लड़की ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की है.

यह भी पढ़ें...

बता दें कि उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जमानियां क्षेत्र के अभईपुर की रहने वाली डॉक्टर आकांक्षा सिंह ने सिविल सेवा परीक्षा पास की है और उन्होंने 301वीं रैंक हासिल की है. इसके बाद साफ हो गया है कि बिहार की आकांक्षा सिंह, जो रणबीर सेना प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती भी हैं, उनका दावा गलत निकला है. 

पीआईबी की तरफ से ये कहा गया

इस मामले को लेकर Press Information Bureau यानी पीआईबी की तरफ ट्वीट आया है. इसमें लिखा गया है कि यूपीएससी आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 301वीं रैंक लाने वाले उम्मीदवार का नाम आकांक्षा सिंह हैं. वह उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की रहने वाली हैं. उनके पिता का नाम रंजित सिंह और मां का नाम नीलम सिंह है. 

अब यूपी की आकांक्षा सिंह को जानिए

अब साफ हो गया है कि गाजीपुर की आकांक्षा सिंह ने 301 रैंक हासिल की है. आकांक्षा ने पेशे से डॉक्टर हैं. वह स्त्री रोग की डॉक्टर हैं. यूपी तक ने इस विवाद के बाद उनसे बात की थी. इस दौरान उन्होंने साफ कहा था कि ये रैंक उन्होंने ही हासिल की है. उन्होंने ये भी बताया था कि ये उनका दूसरा प्रयास था, जिसमें वह सफल हो गई हैं. डॉक्टर आकांक्षा सिंह ने बताया था, पहले प्रयास में मेंस पास हो गया था. मगर कुछ नंबरों से अंतिम चयन से चूक गई थीं, लेकिन इस बार मेहनत रंग लाई.