UP Political News: उत्तर प्रदेश की ताजातरीन और बड़ी खबरों के विश्लेषण के लिए 'आज का यूपी' एक महत्वपूर्ण मंच है. यूपी Tak का खास शो 'आज का यूपी' राज्य की तीन बड़ी खबरों का विस्तृत विश्लेषण पेश करता है. आज के शो की तीन मुख्य खबरों में शामिल हैं पश्चिम बंगाल के फालता में टीएमसी नेता जहांगीर खान के दफ्तर पर हुआ भारी तांडव और तोड़फोड़. बंगाल चुनाव परिणामों के बाद अखिलेश यादव का हनुमान चालीसा वाली चौपाई के साथ किया गया सोशल मीडिया पोस्ट और इस पोस्ट के जरिए सॉफ्ट हिंदुत्व की ओर बढ़ते उनके राजनीतिक कदमों का गहन विश्लेषण.
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फालता में बवाल, जहांगीर खान के दफ्तर पर बीजेपी समर्थकों का धावा
पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान यूपी कैडर के तेजतर्रार आईपीएस अजयपाल शर्मा और टीएमसी नेता जहांगीर खान के बीच का विवाद काफी चर्चा में रहा था. अजयपाल शर्मा ने चुनाव पर्यवेक्षक के तौर पर जहांगीर खान के घर जाकर सख्त चेतावनी दी थी कि किसी भी मतदाता को डराया या धमकाया गया, तो उनका 'कायदे से इलाज' किया जाएगा. अब इस मामले में एक नया मोड़ आया है. फालता सीट पर चुनाव टलने के बाद जहांगीर खान के दफ्तर पर भारी बवाल की तस्वीरें सामने आई हैं.
बीजेपी समर्थकों ने जहांगीर खान के दफ्तर में जमकर तोड़फोड़ की है. दफ्तर में लगे टीएमसी के झंडे फाड़ दिए गए और वहां बीजेपी का झंडा लगा दिया गया. दरअसल, फालता सीट पर मतदान के दिन हिंदू मतदाताओं और बीजेपी समर्थकों को वोटिंग से रोकने की खबरें आई थीं, जिसके बाद चुनाव रद्द कर दिया गया था. अब 21 मई को वहां दोबारा वोटिंग होगी. दफ्तर पर हुए इस हमले को बीजेपी कार्यकर्ताओं के उसी संचित गुस्से का परिणाम माना जा रहा है.
अखिलेश यादव का हनुमान प्रेम, बंगाल नतीजों का 'आफ्टर इफेक्ट'?
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बंपर जीत (206 सीटें) के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने 'बड़े मंगल' के अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर हनुमान चालीसा की चौपाई पोस्ट की है. उन्होंने बजरंगबली की ध्यान मुद्रा वाली फोटो के साथ लिखा 'सब सुख लहे तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना' और 'संकट से हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै.'
राजनीतिक पंडित इस पोस्ट के गहरे मायने निकाल रहे हैं. चर्चा यह है कि क्या बंगाल में हुए ध्रुवीकरण और बीजेपी की प्रचंड जीत ने अखिलेश यादव पर कोई मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया है? इस पोस्ट में 'डर' और 'संकट' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है. हालांकि, यह भी सच है कि अखिलेश यादव हर साल जेठ के बड़े मंगल पर इस तरह की पोस्ट करते रहे हैं, लेकिन इस बार का समय और शब्दों का चयन चर्चा का विषय बना हुआ है.
क्या सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर हैं अखिलेश?
अखिलेश यादव के इस पोस्ट को उनके 'सॉफ्ट हिंदुत्व' कार्ड के तौर पर देखा जा रहा है. बंगाल के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक ध्रुवीकरण की स्थिति में मुकाबला कठिन हो सकता है. ऐसे में अखिलेश यादव खुद को केवल एक विशेष समुदाय (मुस्लिम) के नेता के तौर पर ब्रांड नहीं होने देना चाहते.
अखिलेश यादव अपनी रणनीतियों को धार दे रहे हैं ताकि उन पर 'मुस्लिम परस्त' राजनीति का टैग न लगे. केदारेश्वर मंदिर का दौरा हो या पूजा-पाठ की तस्वीरें साझा करना, अखिलेश लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि वे सर्वसमाज और हिंदू आस्थाओं का भी सम्मान करते हैं. 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले मुस्लिम ध्रुवीकरण के संभावित खतरे को भांपते हुए, वे अपने एम-वाई (M-Y) समीकरण से इतर एक व्यापक हिंदू छवि बनाने की कोशिश में जुटे हैं.
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