OTD CM Fellow in UP: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश को आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए 'वन ट्रिलियन डॉलर मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम' को मंजूरी दी गई है. इसके तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी जो विकास कार्यों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करेंगे. साथ ही न्याय प्रक्रिया को तेज करने के लिए डिजिटल साक्ष्य और ई-समन जैसे नियम लागू किए गए हैं.
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विशेषज्ञों को मिली ये जिम्मेदारी
प्रत्येक जिले में दो विशेषज्ञ इकोनॉमिक डेवलपमेंट फेलो और डेटा एनालिस्ट फेलो तैनात होंगे. ये फेलो जिलाधिकारी के नेतृत्व में कृषि, उद्योग, निवेश और पर्यटन जैसे क्षेत्रों की समीक्षा करेंगे और विकास की रणनीति तैयार करेंगे. योजनाओं की निगरानी के लिए डिजिटल डैशबोर्ड का उपयोग होगा जिससे हर सेक्टर की प्रगति को ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा.
कौन बन सकता है CM फेलो ?
योग्यता: उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री होनी अनिवार्य है.
आयु व चयन: अधिकतम आयु 40 वर्ष है और चयन लिखित परीक्षा, योग्यता व साक्षात्कार के आधार पर स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन करेगा.
वेतन: चयनित युवाओं को ₹50,000 प्रति माह मानदेय के साथ लैपटॉप, यात्रा भत्ता और आवासीय सुविधा दी जाएगी.
चयन प्रक्रिया और पात्रता
सरकार ने इस फेलोशिप के लिए कड़े मानक तय किए हैं.
योग्यता: उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में स्नातकोत्तर (Post-Graduate) डिग्री होनी चाहिए.
आयु सीमा: अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है.
चयन का आधार: चयन प्रक्रिया तीन चरणों में होगी. लिखित परीक्षा (50 अंक), योग्यता/वरीयता (30 अंक) और साक्षात्कार (20 अंक).
जिम्मेदारी: चयन का पूरा दायित्व 'उत्तर प्रदेश राज्य परिवर्तन आयोग' को सौंपा गया है.
डिजिटल सबूत और ई-समन लागू
कैबिनेट बैठक में सिर्फ विकास योजनाओं पर ही नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर भी बड़ा फैसला लिया गया. नई व्यवस्था के तहत तीन अहम नियम लागू किए गए हैं ई-साक्ष्य प्रबंधन नियम, ई-समन (इलेक्ट्रॉनिक समन) नियम और सामुदायिक सेवा गाइडलाइंस 2026. अब डिजिटल सबूत जैसे मोबाइल डेटा, वीडियो और ईमेल को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित किया जाएगा और अदालत में पेश किया जाएगा. इससे छेड़छाड़ की संभावना कम होगी और केस मजबूत होंगे. ई-समन व्यवस्था के तहत अब कोर्ट के नोटिस डिजिटल माध्यम से भेजे जा सकेंगे, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी. वहीं छोटे अपराधों में जेल भेजने के बजाय सामुदायिक सेवा कराई जाएगी. जैसे सफाई, वृक्षारोपण और ट्रैफिक प्रबंधन. इससे जेलों पर बोझ कम होगा और अपराधियों को सुधार का मौका मिलेगा.
शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर बड़े फैसले
प्रदेश के 150 सरकारी स्कूलों में रोबोटिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी ट्रेनिंग के लिए आधुनिक लैब्स बनाई जाएंगी. इसके साथ ही गौतमबुद्ध नगर (यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र) में ₹653 करोड़ की लागत से आधुनिक जीआईएस बिजली उपकेंद्र बनाया जाएगा ताकि उद्योगों और फिल्म सिटी को निर्बाध बिजली मिल सके.
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