जंतर-मंतर पर फूट-फूट कर रोए छात्र नेता अभिजीत दीपके, सोनम वांगचुक की जगह खुद करेंगे अनशन

Abhijeet Dipke Emotional: जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद छात्र नेता अभिजीत दीपके भूख हड़ताल पर बैठ गए और मंच पर भावुक होकर रो पड़े. सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि दिल्ली पुलिस ने इसे मेडिकल और कानूनी प्रक्रिया बताया.

Abhijeet Dipke Emotional

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Abhijeet Dipke Emotional: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन अब एक हाई-वोल्टेज मोड़ पर पहुंच गया है. नीट जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के खिलाफ पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन अस्पताल ले गई. इस घटना के बाद धरना स्थल पर हड़कंप मच गया. सोनम वांगचुक को हटाए जाने के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और छात्र नेता अभिजीत दीपके खुद मंच पर भूख हड़ताल पर बैठ गए. अनशन शुरू करते ही अभिजीत दीपके अचानक मंच पर ही बेहद भावुक हो गए और अपने चेहरे पर दोनों हाथ रखकर फूट-फूट कर रोने लगे. उन्हें इस तरह बिलखता देख उनके साथियों ने उन्हें संभाला और ढांडस बंधाया. अब अभिजीत के रोने का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

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अभिजीत ने शुरू की भूख हड़ताल

शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने भारी बल के साथ जंतर-मंतर पर पहुंचकर चादर से ढंककर सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट कर दिया. इसके विरोध में छात्रों ने धरना स्थल पर जोरदार नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया. मंच पर सोनम वांगचुक की जगह उनकी तस्वीर रख दी गई. उनकी आवाज को आगे बढ़ाने के लिए अभिजीत दीपके खुद अनशन पर बैठ गए जहां वे माहौल को देखकर अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए.

सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज का आरोप

अभिजीत दीपके के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे समाजवादी पार्टी के सबसे युवा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए. सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने आरोप लगाया कि जब अभिजीत सुबह वॉशरुम गए थे तो पुलिस ने उन्हें वहीं रोक लिया. जमीन पर रगड़ा और धमकी देते हुए कहा कि 'अब देखते हैं तुम जंतर-मंतर कैसे जाते हो.' पुलिस ने उन्हें वहीं डिटेन कर लिया था.

कमिश्नर बदलने पर उठाए सवाल 

सपा सांसद ने सरकार को घेरते हुए कहा 'कल ही अचानक दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को बदला गया और नए कमिश्नर आते ही यह तानाशाही भरा मंजर दिखाया गया. सरकार के पास हर चीज का सिर्फ बहाना है, वह संवाद नहीं करना चाहती. पूरे देश ने देखा कि सोनम सर को एक कैदी की तरह उठाकर ले जाया गया. अब देश की आंखें खुल चुकी हैं, इस देश में लोकतंत्र मर चुका है.'

अभिजीत दीपके ने लगाया मारपीट का आरोप

इससे पहले अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए दिल्ली पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था. उन्होंने लिखा 'दिल्ली पुलिस ने मुझे पीटा और हिरासत में लिया.' प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस की यह पूरी प्लानिंग थी ताकि धरना स्थल से अभिजीत को हटाकर मंच को खाली कर दिया जाए और फिर आसानी से सोनम वांगचुक को वहां से उठा लिया जाए.

दिल्ली पुलिस  ने क्या बताया

दूसरी तरफ हंगामे के बीच नई दिल्ली के डीसीपी का आधिकारिक बयान सामने आया है. पुलिस ने साफ किया है कि यह कदम किसी तानाशाही के तहत नहीं बल्कि कानूनी और मेडिकल प्रक्रिया के तहत उठाया गया है. पुलिस का कहना है कि सोनम वांगचुक 20 दिनों से भूखे थे और उनकी सेहत लगातार गिर रही थी.

पुलिस आलाधिकारियों के मुताबिक, माननीय हाईकोर्ट के आदेशानुसार और डॉक्टरों की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उन्हें बेहतर सुपरविजन और इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में शिफ्ट किया गया है.

क्या हैं आंदोलन की मुख्य मांगें?

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक 28 जून से परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, एनटीए में सुधार और परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की मांग को लेकर अड़े हुए हैं. छात्र और प्रदर्शनकारी लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.