Sonam Wangchuk: दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने हटा दिया है.पुलिस की इस अचानक हुई कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस बल के बीच तीखी झड़प देखने को मिली. सोशल मीडिया पर इस टकराव की तस्वीरें वायरल होने के बाद कोहराम मच गया है. एक तरफ जहां प्रदर्शनकारी छात्र और विपक्षी दल दिल्ली पुलिस पर बर्बरता, मारपीट और तानाशाही का आरोप लगा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई कोर्ट के निर्देश और सोनम वांगचुक की गिरती सेहत को देखते हुए की गई है.
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छात्रों का गंभीर आरोप
धरना स्थल पर मौजूद छात्र नेता अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस पर बेहद गंभीर और संगीन आरोप लगाए हैं. अभिजीत का आरोप है कि 60 साल के बुजुर्ग और पिछले 20-21 दिनों से भूखे वैज्ञानिक सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस के जवानों ने गाली-गलौज करते हुए जबरन घसीटकर वहां से उठाया.
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि जब अन्य छात्र मौके पर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे तो पुलिस ने उनके साथ मारपीट की. उन्हें सड़कों पर घसीटा और कई छात्रों के फोन तक छीन लिए. विदेश से लौटे एक छात्र ने अपनी फटी टी-शर्ट दिखाते हुए आरोप लगाया कि 'जब मैं मदद के लिए चिल्ला रहा था तो पुलिस ने मेरा मुंह दबा दिया और कहा कि तुम लोगों की चर्बी चढ़ी है अब दिखाते हैं. इस देश में डेमोक्रेसी नहीं बची है.'
'हाईकोर्ट के आदेश और मेडिकल सलाह पर हुई कार्रवाई'
हंगामे और आरोपों के बीच दिल्ली पुलिस ने अपना आधिकारिक पक्ष सामने रखा है. पुलिस के मुताबिक सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर थे और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी. दिल्ली हाई कोर्ट के पुराने दिशा-निर्देशों के अनुसार सरकारी डॉक्टरों की टीम नियमित रूप से उनके स्वास्थ्य की जांच कर रही थी. डॉक्टर्स की तत्काल मेडिकल सलाह के बाद ही उन्हें उचित इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में शिफ्ट किया गया है.
पुलिस का कहना है कि पूरी कार्रवाई बेहद संयम और शांति के साथ की जा रही थी. लेकिन वहां मौजूद कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस का रास्ता रोकने और बाधा डालने की कोशिश की जिसके कारण मौके पर हल्की झड़प जैसी स्थिति बनी.
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है और लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.
लक्ष्मण यादव ने लिखा 'सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से जबरन हटाना केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकारों पर प्रश्नचिह्न है.लोकतंत्र में असहमति का जवाब संवाद से दिया जाता है, दमन से नहीं. वहीं समाजवादी पार्टी के आधिकारिक पेज से आरोप लगाया गया कि भाजपा सरकार तानाशाही की हर सीमा पार कर रही है. पहले भाजपाइयों से हमला करवाया गया और जब वे नहीं डरे तो पुलिस के जरिए उन्हें जबरन उठवा दिया गया.
आखिर क्यों भूख हड़ताल पर बैठे थे सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर लगातार अनशन पर बैठे थे. उनके इस आंदोलन की प्रमुख मांगें थीं.
1.प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे NEET/NET) में कथित पेपर लीक और धांधली को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग.
2.नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बड़े सुधार और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग.
3.वांगचुक का कहना था कि अगर महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार जवाबदेह हो सकती है तो देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों पर भी सरकार की जवाबदेही तय होनी ही चाहिए. अस्पताल ले जाए जाने से ठीक पहले उन्होंने देशवासियों से 'चलो संसद मार्च' में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील भी की थी.
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