दारोगा भर्ती परीक्षा में अवसरवादी वाले सवाल पर 'पंडित' विकल्प पर मचा खूब बवाल फिर बोर्ड को ये कहना पड़ा

Bharti Board Reply: UP Police SI भर्ती परीक्षा के प्रश्न पत्र में 'पंडित' विकल्प को लेकर छिड़ा विवाद. बीजेपी विधायक शलभ मणि त्रिपाठी और डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने जताई कड़ी आपत्ति. भर्ती बोर्ड ने दिए जांच के आदेश.

UP SI Paper

यूपी तक

15 Mar 2026 (अपडेटेड: 15 Mar 2026, 12:27 PM)

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Bharti Board Reply: उत्तर प्रदेश पुलिस दरोगा (SI) भर्ती परीक्षा के पहले दिन ही एक सवाल को लेकर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है.प्रश्न पत्र में दिए गए विकल्पों में 'पंडित' शब्द के इस्तेमाल पर ब्राह्मण समाज और भाजपा के कई नेताओं ने तीखी आपत्ति जताई. वहीं भाजपा विधायकों ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.

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क्या था वो विवादित सवाल?

परीक्षा में हिंदी विषय के अंतर्गत 'वाक्यांश के लिए एक शब्द' का प्रश्न पूछा गया था. सवाल थी 'अवसर के अनुसार बदल जाने वाला' - इस वाक्यांश के लिए एक शब्द का चयन कीजिए. वहीं इसके चार विकल्प थे (A) पंडित, (B) अवसरवादी, (C) निष्कपट, (D) सदाचारी. हालांकि सही उत्तर 'अवसरवादी' है. लेकिन 'पंडित' शब्द को नकारात्मक अर्थ (अवसरवादिता) वाले प्रश्न के विकल्प के रूप में रखने पर आपत्ति जताई गई.

भाजपा नेताओं का कड़ा विरोध

देवरिया सदर से भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी और भाजपा के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्रा ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा 'पंडित शब्द विद्वान और ज्ञानी वर्ग का प्रतीक है. इसे नकारात्मक अर्थ वाले प्रश्न में शामिल करना किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा लगता है. यह समाज के प्रबुद्ध वर्ग की भावनाओं को आहत करने और सरकार की छवि धूमिल करने का प्रयास है.'

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक का एक्शन

विवाद बढ़ता देख डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि सरकार ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है. उन्होंने कहा कि किसी भी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने इस प्रकरण की तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं और कहा कि जो भी संस्था या व्यक्ति इसके लिए जिम्मेदार होगा उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

भर्ती बोर्ड का स्पष्टीकरण

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने देर शाम बताया कि प्रश्न पत्र बोर्ड द्वारा स्थानीय स्तर पर तैयार नहीं किए जाते बल्कि अति गोपनीय बाहरी संस्थाएं इसे तैयार करती हैं. गोपनीयता बनाए रखने के लिए बोर्ड का कोई भी अधिकारी परीक्षा से पहले प्रश्न पत्रों का अवलोकन नहीं करता. बोर्ड ने आश्वस्त किया है कि इस विशिष्ट प्रश्न के संबंध में जांच के आदेश दे दिए गए हैं.