Mohsina Kidwai death news: देश की राजनीति का एक सम्मानित चेहरा आज हमेशा के लिए खामोश हो गया है. कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई के निधन की खबर ने राजनीतिक गलयारों से लेकर आम लोगों के बीच दुख की लहर दौड़ गई है. मोहसिना की मौत से न सिर्फ कांग्रेस पार्टी बल्कि पूरे देश की राजनीति को एक बड़ी क्षति हुई है. खासकर उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में शोक की लहर दौड़ गई है, जहां से उनका गहरा जुड़ाव रहा है.लोग उन्हें एक सरल , सुलझी और जनता से जुड़ी नेता के रूप में याद कर रहे हैं.
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दिल्ली में ली अंतिम सांस
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कई बार सांसद रहीं मोहसिना किदवई का लगभग 94 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने आज सुबह दिल्ली के एक निजी अस्पताल में आखरी सांस ली. ऐसा बताया जा रहा है कि वह उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं. उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे उत्तर प्रदेश और खासकर बाराबंकी जिले में शोक की लहर दौड़ गई.
लंबा और प्रभावशाली रहा राजनीतिक जीवन
मोहसिना किदवई का राजनीतिक जीवन बेहद लंबा और प्रभावशाली रहा है.वह कांग्रेस पार्टी की कद्दावर नेताओं में गिनी जाती थीं और गांधी परिवार के काफी करीबी मानी जाती थीं. यही नहीं उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल में केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली थी. उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, शहरी विकास, पर्यटन, परिवहन और ग्रामीण विकास जैसे अहम मंत्रालयों का सफलतापूर्वक संचालन किय .
इसके अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार में भी खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, समाज कल्याण और लघु उद्योग जैसे विभागों में मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया.
बाराबंकी से रहा गहरा जुड़ाव
मोहसिना किदवई का बाराबंकी जिले से गहरा जुड़ाव रहा है. उनका ननिहाल और ससुराल दोनों ही मसौली क्षेत्र में स्थित था. वह अक्सर अपने गांव आया करती थीं और स्थानीय लोगों से उनका विशेष लगाव था. उनके परिवार के सदस्य महमूद किदवई ने बताया कि उनके निधन से पूरा परिवार गमगीन है और यह उनके लिए अपूरणीय क्षति है.
राजनीति की शुरुआत से राष्ट्रीय स्तर तक बनाई पहचान
मोहसिना किदवई का जन्म 1 जनवरी 1932 को एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था. वह उच्च शिक्षित थीं और शुरुआत से ही सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं. उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति से अपने करियर की शुरुआत की और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई.
उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में उत्तर प्रदेश विधान परिषद और विधानसभा की सदस्यता के साथ-साथ कई बार लोकसभा और राज्यसभा सांसद के रूप में देश की सेवा की. वह मेरठ से लोकसभा सांसद रहीं और बाद में राज्यसभा के लिए भी निर्वाचित हुईं.
अलग पहचान बनाने वाली मजबूत नेता
मोहसिना किदवई को एक मजबूत, अनुभवी और जमीन से जुड़ी नेता के रूप में जाना जाता था. उनकी पहचान एक सुलझी हुई और प्रभावशाली राजनेता की रही, जिनका प्रदेश और केंद्र की राजनीति में लंबे समय तक दबदबा रहा. बता दें कि उनका सुपुर्द-ए-खाक दिल्ली में ही किया जाएगा. उनके निधन पर कांग्रेस नेताओं समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है.
कई नेताओं ने जताया शोक
मोहसिना किदवई के निधन पर बाराबंकी सहित विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं और सामाजिक लोगों ने गहरा दुख व्यक्त किया है. शोक व्यक्त करने वालों में चचा अमीर हैदर, पूर्व सांसद पी. एल. पुनिया, सांसद तनुज पुनिया, पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद सिंह गोप, रामनगर विधायक फरीद महफूज किदवई, बीजेपी सरकार के खाद्य एवं रसद मंत्री सतीश शर्मा, पूर्व बीजेपी सांसद एवं प्रदेश महामंत्री प्रियंका रावत, बार के पूर्व अध्यक्ष जगत बहादुर सिंह, सुरेंद्र उर्फ बबन सिंह, अधिवक्ता रणधीर सिंह सुमन, वरिष्ठ पत्रकार रिजवान मुस्तफा, हशमत उल्लाह, के. पी. तिवारी, नरेंद्र मिश्रा, रेहान किदवई, मिस्बा किदवई, दानिश किदवई और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष फवाद किदवई शामिल रहे. इसके अलावा नीचे पूर्व कैबिनेट मंत्री राकेश वर्मा, सपा नेता ज्ञान सिंह यादव और पूर्व बीजेपी जिलाध्यक्ष अरविंद मौर्य ने भी गहरा शोक व्यक्त किया.
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