मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूती के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है. वित्तीय अनुशासन और प्रभावी नीतियों के चलते प्रदेश के राजस्व में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश के राजस्व संग्रह में ₹10,228 करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड इजाफा हुआ है.
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मार्च में भी दिखा आर्थिक मजबूती का असर
वित्त मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष मार्च 2025 के मुकाबले मार्च 2026 में राजस्व संग्रह में ₹1020.53 करोड़ की वृद्धि हुई है. मार्च 2026 में कुल ₹26,193.56 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ. वहीं, पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 की कुल प्राप्ति ₹2,23,060.18 करोड़ तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में ₹2,12,832.08 करोड़ थी.
जीएसटी, स्टाम्प और परिवहन क्षेत्र में उछाल
राजस्व के विभिन्न मदों पर नजर डालें तो मार्च 2026 में जीएसटी से ₹7,347.31 करोड़ की आय हुई. परिवहन क्षेत्र में सबसे उल्लेखनीय प्रगति देखी गई, जहां राजस्व ₹951.98 करोड़ से बढ़कर ₹1,624.84 करोड़ हो गया. इसके अलावा, स्टाम्प एवं निबंधन से ₹2,728.74 करोड़ और खनिकर्म से ₹784.41 करोड़ की प्राप्ति हुई. पूरे वित्तीय वर्ष में आबकारी विभाग ने भी ₹57,722.29 करोड़ का बड़ा योगदान दिया है.
यूपी बना ₹35,000 करोड़ का 'रेवेन्यू सरप्लस' राज्य
उत्तर प्रदेश अब देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जो आर्थिक रूप से पूरी तरह सुदृढ़ हैं. वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि राज्य के पास वर्तमान में ₹35,000 करोड़ से अधिक का 'रेवेन्यू सरप्लस' (राजस्व अधिशेष) उपलब्ध है. बेहतर वित्तीय प्रबंधन का प्रमाण यह भी है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के मूल बजट का लगभग 81% हिस्सा जनहित के कार्यों पर व्यय किया जा चुका है. सरकार ने सभी विभागों को नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कार्य योजनाएं शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए हैं.
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