मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए ‘विकसित यूपी@2047’ का रोडमैप तैयार कर लिया है. इस योजना का मुख्य केंद्र पर्यावरणीय संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और संतुलित विकास है, जिससे उत्तर प्रदेश को सतत विकासके क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाया जा सके.
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स्वच्छ ऊर्जा पर बड़ा लक्ष्य: 2047 तक 70% का टारगेट
राज्य सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव का लक्ष्य रखा है. इसके तहत प्रदेश की कुल ऊर्जा क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी को 2047 तक बढ़ाकर 70% तक पहुंचाया जाएगा. इस लक्ष्य को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा वर्ष 2029-30 तक 29%, 2035-36 तक 45% और अंततः 2046-47 तक इसे 70% किया जाएगा. इसके साथ ही, बिजली वितरण घाटे को 8 से 10% तक सीमित करने और रूफटॉप सोलर क्षमता को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
बुंदेलखंड, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी में ग्रीन हाइड्रोजन हब
औद्योगिक विकास को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए बुंदेलखंड, पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 'ग्रीन हाइड्रोजन हब' विकसित किए जाएंगे. इससे उर्वरक, रिफाइनिंग और भारी उद्योगों को स्वच्छ ऊर्जा मिल सकेगी. इसके साथ ही, राज्य में परमाणु ऊर्जा के विकास के लिए 'स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स' में निवेश आकर्षित किया जाएगा. उल्लेखनीय है कि अयोध्या को देश की पहली सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जा चुका है, जिसके सफल प्रयोग अब अन्य शहरों में भी लागू होंगे.
आपदा प्रबंधन के लिए रियल-टाइम डैशबोर्ड और डेटा प्लेटफॉर्म
प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को कम करने के लिए योगी सरकार जीआईएस (GIS) और रिमोट सेंसिंग तकनीक पर आधारित एक 'रियल-टाइम डैशबोर्ड' विकसित करेगी. यह डैशबोर्ड आईएमडी और एनडीएमए जैसी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से जुड़ा होगा, जिससे बाढ़, सूखा, हीटवेव और वायु गुणवत्ता का सटीक आकलन कर समय पर कदम उठाए जा सकें.
नदियों का पुनर्जीवन और जलवायु रणनीति
पर्यावरण संतुलन के लिए 'नमामि गंगे' कार्यक्रम के तहत नदियों के पुनर्जीवन, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण और भूजल प्रबंधन पर कार्य तेज किया गया है. राज्य में 'स्टेट एक्शन ऑन क्लाइमेट चेंज 2.0' लागू किया गया है और वर्ल्ड बैंक के सहयोग से पीएम 2.5 के स्तर को कम करने के लिए 10 वर्षीय रोडमैप पर काम शुरू कर दिया गया है. यह योजना न केवल पर्यावरण को सुरक्षित करेगी, बल्कि 2047 तक उत्तर प्रदेश को आर्थिक और पारिस्थितिक रूप से सशक्त बनाएगी.
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