UP Weather Today: उत्तर प्रदेश में आज 5 सितंबर को मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलने वाला है. उमस और गर्मी से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है. उत्तरी-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी पर बने निम्न दबाव के क्षेत्र और मानसूनी द्रोणी के प्रभाव से प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश होने की संभावना है.
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मौसम विभाग ने पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में झमाझम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई है. IMD ने भारी बारिश की संभावना को देखते हुए पश्चिमी यूपी के 17 जिलों में बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया है. लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है. किसानों को भी फसलों को नुकसान से बचाने के लिए विशेष सलाह दी गई है.
पश्चिमी यूपी में येलो अलर्ट
मौसम विभाग के मुताबिक, आज 5 सितंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मानसून पूरी तरह मेहरबान रहने वाला है. इस संभाग में अनेक स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने की अधिक संभावना है. मौसम के इस बदलते मिजाज को देखते हुए मौसम विभाग ने पश्चिमी यूपी के कई जिलों में 'येलो अलर्ट' जारी किया है.
पूर्वी यूपी में अलर्ट नहीं
पश्चिमी यूपी की तरह ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी मौसम सुहावना रहने के आसार हैं. पूर्वानुमान के मुताबिक, यहां भी अनेक स्थानों पर वर्षा और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की पूरी संभावना है. राहत की बात यह है कि पूर्वी यूपी के लिए मौसम विभाग ने कोई चेतावनी या अलर्ट जारी नहीं किया है.
इन 17 जिलों में रहें सावधान
मौसम विभाग ने भारी बारिश की संभावना को देखते हुए जिन 17 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है, वे सभी पश्चिमी यूपी के हिस्से हैं. इनमें सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, आगरा, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद और संभल शामिल हैं. इन जिलों और इनके आस-पास के क्षेत्रों में लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है.
किसानों के लिए जरूरी सलाह
लगातार बारिश और जलभराव से फसलों को भारी नुकसान हो सकता है. ऐसे में किसानों को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखने की सलाह दी गई है.
गन्ना, मक्का और धान: खेतों से तुरंत अतिरिक्त पानी निकालें. जलभराव की स्थिति में किसी भी तरह के उर्वरक (यूरिया आदि) का इस्तेमाल न करें.
अरहर, मूंगफली और तिल: जड़ों में पानी रुकने से जड़ सड़ने और फली सड़ने की बीमारी हो सकती है. जल निकासी के लिए नालियां साफ रखें और अत्यधिक गीली मिट्टी में निराई-गुड़ाई बिल्कुल न करें.
सब्जियां और बागवानी: उठी हुई क्यारियों और नालियों के माध्यम से पानी बाहर निकालें. पपीता और केला जैसी फसलों में पौधों को सहारा दें ताकि वे तेज हवा में गिरें नहीं.
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