जापान के यामानाशी में हाइड्रोजन प्लांट में पहुंचे CM योगी, यूपी में भी लागू होगा क्लीन एनर्जी प्लान!

CM Yogi visits hydrogen plant in Yamanashi: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान के यामानाशी में अत्याधुनिक हाइड्रोजन ऊर्जा संयंत्र का दौरा किया. उन्होंने सौर और पवन ऊर्जा से हाइड्रोजन बनाने वाली 'पावर-टू-गैस' तकनीक की जानकारी ली और इसे उत्तर प्रदेश के लिए हरित विकास का प्रभावी मॉडल बताया.

CM Yogi visits hydrogen plant in Yamanashi

यूपी तक

26 Feb 2026 (अपडेटेड: 26 Feb 2026, 07:21 PM)

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CM Yogi visits hydrogen plant in Yamanashi: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने जापान दौरे के दौरान क्लीन एनर्जी और हरित विकास के वैश्विक मॉडल्स को करीब से देख रहे हैं. गुरुवार को मुख्यमंत्री ने यामानाशी प्रांत स्थित विश्व स्तरीय हाइड्रोजन ऊर्जा संयंत्र का भ्रमण किया. इस दौरान उन्होंने वहां की अत्याधुनिक 'पावर-टू-गैस' (P2G) प्रणाली का निरीक्षण किया और विशेषज्ञों से तकनीकी सहयोग व कार्यप्रणाली पर विस्तृत चर्चा की. यह दौरा उत्तर प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

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पावर-टू-गैस प्रणाली की बारीकियों को समझा

संयंत्र के भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री ने देखा कि कैसे सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से उत्पन्न बिजली को हाइड्रोजन में परिवर्तित किया जाता है. विशेषज्ञों ने उन्हें जानकारी दी कि इस हाइड्रोजन का उपयोग स्वच्छ ईंधन, ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) और परिवहन के लिए किया जाता है. इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इससे कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) शून्य हो जाता है जो पर्यावरण संरक्षण के लिए क्रांतिकारी है.

उत्तर प्रदेश के लिए 'ग्रीन हाइड्रोजन' विजन

यामानाशी की इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए सीएम योगी ने कहा कि 'ग्रीन हाइड्रोजन' भविष्य की ऊर्जा का आधार है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार भी राज्य में सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने के लिए ठोस नीतिगत कदम उठा रही है. मुख्यमंत्री ने इस मॉडल को स्वच्छ ऊर्जा और हरित विकास के लिए एक प्रभावी मार्गदर्शक बताया. मुख्यमंत्री का यह दौरा जापान के साथ तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है. उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश और नई तकनीकों को प्रोत्साहित करने के लिए इस तरह के जापानी मॉडल्स को अपनाने पर विचार किया जा रहा है. इससे राज्य में 'ग्रीन मोबिलिटी' परियोजनाओं को नई गति मिलेगी और प्रदूषण मुक्त परिवहन की दिशा में तेजी से काम हो सकेगा.
 

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