ट्रांसफर के नाम पर धीरेंद्र झा और इमरान अहमद को वसूली करना पड़ा भारी, योगी सरकार ने दोनों अधिकारियों पर की बड़ी कार्रवाई

आशीष श्रीवास्तव

31 May 2026 (अपडेटेड: 20 Jul 2026, 11:57 AM)

UP Transfer Commission Scam News: भ्रष्टाचार के मामलों पर सख्ती दिखाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने व्यावसायिक शिक्षा विभाग के दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. बता दें दोनों अधिकारियों पर गंभीर अनियमितताओं और कमीशनखोरी के आरोप लगे हैं.

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CM Yogi Adityanath (File Photo)

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CM Yogi Action On Corrupt Officers: भ्रष्टाचार के मामलों पर सख्ती दिखाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने व्यावसायिक शिक्षा विभाग के दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. बता दें दोनों अधिकारियों पर कमीशनखोरी के आरोप लगे हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत प्रशिक्षण निदेशालय में तैनात सहायक निदेशक धीरेन्द्र कुमार झा और प्रधान सहायक इमरान अहमद पर कार्रवाई की गई है. दोनों अधिकारियों पर तबादलों के नाम पर कथित कमीशनखोरी, रिश्वत लेने और पद के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. सरकार की इस कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है.

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तबादलों के नाम पर वसूली के आरोप

जानकारी के अनुसार व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने दोनों अधिकारियों के निलंबन का आदेश जारी किया है. इसके बाद निदेशक प्रशिक्षण अभिषेक सिंह ने आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कराया. विभागीय जांच में सामने आया कि स्थानांतरण यानि ट्रांसफर के दौरान कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों से तबादले कराने के बदले धन की मांग की जा रही थी. आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में कमीशनखोरी का खेल चल रहा था और संबंधित अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई. सूत्रों के मुताबिक कई मामलों में स्थानांतरण के बदले करीब 10 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने की शिकायतें मिली थीं.

इमरान अहमद पर भी लगे गंभीर आरोप

प्रधान सहायक इमरान अहमद के खिलाफ भी कई शिकायतें दर्ज कराई गई थीं. उन पर भ्रष्टाचार के अलावा कर्मचारियों को परेशान करने और धार्मिक आधार पर भेदभाव करने के आरोप लगाए गए हैं. विभागीय स्तर पर हुई प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लोगों के साथ मिलकर शिकायतों का एक नेटवर्क तैयार किया गया था. आरोप है कि विभाग में अलग-अलग नामों से शिकायतें दर्ज कराई जाती थीं और बाद में उन शिकायतों को निपटाने या कार्रवाई रुकवाने के नाम पर संबंधित कर्मचारियों से पैसे मांगे जाते थे.

शिकायतों के जरिए बनाया जाता था दबाव

जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि कुछ मामलों में कर्मचारियों पर दबाव बनाने के लिए शिकायतों का सहारा लिया जाता था. इसके बाद मामले को शांत कराने या कार्रवाई से बचाने के बदले धन उगाही की जाती थी. अधिकारियों का मानना है कि इस तरह विभाग में डर और दबाव का माहौल बनाकर कथित रूप से अवैध लाभ लिया जा रहा था. 

जांच के बाद हो सकती है और कड़ी कार्रवाई

सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी. यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो आगे और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है. इस कार्रवाई के बाद विभाग के कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है. माना जा रहा है कि राज्य सरकार प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त रुख अपनाए हुए है.