यूपी के हर गांव तक जाएगी सरकारी बस, 'सीएम ग्राम परिवहन योजना' के तहत इन जिलों में दौड़ी 215 मिनी बसें

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20 Jul 2026 (अपडेटेड: 20 Jul 2026, 05:28 PM)

उत्तर प्रदेश सरकार ने 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना' के तहत राज्य के 56 जिलों में 215 मिनी बसों की सेवाएं शुरू की है. यह बस सेवाएं कैबिनेट से मार्च महीने में मिली मंजूरी के बाद महज चार महीनों के अंदर ही शुरू कर दी गई हैं.

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UP Mini Bus Service: उत्तर प्रदेश सरकार ने यातायात को सुगम बनाने के लिए यूपी के ग्रामीणों को बड़ी सौगात दी है. प्रदेश की सरकार ने 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना' के तहत राज्य के 56 जिलों में 215 मिनी बसों की सेवाएं शुरू की है. यह बस सेवाएं कैबिनेट से मार्च महीने में मिली मंजूरी के बाद महज चार महीनों के अंदर शुरू कर दी गई हैं. सरकार का उद्देश्य है कि गांवों में रह रहे लोगों को इन बस सेवाओं के जरिए सीधे शहर, ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय से सीधे जोड़ा जाए. यह बसें उन मार्गों पर चलाई जाएंगी जहां यातायात के लिए पहले कोई भी सरकारी साधन उपलब्ध नहीं था. 

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गांवों को मिलेगी बेहतर परिवहन सुविधा

सरकार ने इस योजना को मार्च में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान मंजूरी दी थी. इस योजना के तहत मिनी बसें उन सड़कों पर चलाई जा रही हैं, जहां यातायात के लिए सरकारी साधन उपलब्ध नहीं है. जानकारी के मुताबिक जिन रास्तों पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की बसें कम हैं, वहां प्राइवेट बस ऑपरेटरों की मदद ली जा रही है.

जनसंपर्क विभाग ने दी सूचना

उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने सोशल मिडिया पर जानकारी देते हुए लिखा है कि मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित और सुगम बस सेवा का संचालन शुरू किया गया है. योजना का उद्देश्य प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों को परिवहन सुविधा से जोड़ते हुए ग्रामीण नागरिकों को ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय तक सुरक्षित, सुलभ एवं सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराना है.

छप्पन जिलों में दौड़ीं मिनी बसें

आंकड़ों के अनुसार राज्य के 75 जिलों में से 56 जिलों में 215 मिनी बसों का संचालन शुरू हो चुका है. सबसे ज्यादा 43 बसें प्रयागराज में चल रही हैं. इसके अलावा मुजफ्फरनगर में 27, झांसी में 19, मथुरा में 18, जौनपुर में 7, हापुड़ में 6, बांदा और एटा में 5-5, मऊ और जालौन में 4-4 और बलिया में 3 बसें सड़कों पर उतारी गई हैं.

योजना से युवाओं को मिला रोजगार

इस योजना का सीधा फायदा गांव में रहने वाले लाखों परिवारों को होगा. इन मिनी बसों के संचालन के लिए स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं. बस के ड्राइवर और कंडक्टर के चयन में क्षेत्रीय आवेदकों को प्राथमिकता मिल रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्वावलंबन को बढ़ावा मिल रहा है. इसके साथ ही सरकार और परिवहन विभाग धीरे-धीरे इस योजना का दायरा भी बढ़ा रही है, जिससे राज्य के आखिरी गांव तक यातायात की अच्छी सुविधा पहुंचाई जा सके.

मिनी बसों के लिए जरूरी नियम

योजना के तहत पूरे राज्य में 15 से 28 सीटों वाली मिनी बसें चलाई जा रही है. जिनमें डीजल, सीएनजी (CNG) या इलेक्ट्रिक वाली बसों को शामिल किया गया है. इस योजना के तहत बस 8 साल से ज्यादा पुरानी नहीं हो सकती है. इसके अलावा दिल्ली एनसीआर (NCR) से सटे जिलों में प्रदूषण को देखते हुए सिर्फ सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसें चलाने की ही अनुमति दी गई है.

बस मालिकों को परमिट से छूट

बसों को शुरुआत में 10 साल तक चलाने की अनुमति दी जाएगी, जिसे आगे 5 साल और बढ़ाया जा सकेगा. उम्र की बात करें तो, डीजल बसें अधिकतम 10 साल तक और सीएनजी व इलेक्ट्रिक बसें 15 साल तक चल सकेंगी. इस योजना के तहत योग्य आवेदकों को चुनने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है. तो वहीं योजना को बिना किसी प्रशासनिक देरी के लागू करने के लिए सरकार ने बस संचालन के लिए अनिवार्य परमिट की शर्त से छूट दे दी है.