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UP किसका: प्रयागराज में अतीक अहमद वाली सीट पर इस समय कौन पड़ रहा भारी?

Prayagraj City West Assembly 2027: अतीक अहमद के अंत के बाद प्रयागराज शहर पश्चिमी में किसका होगा राज? सिद्धार्थनाथ सिंह बचा पाएंगे किला या सपा का पीडीए मारेगा बाजी? जानिए 2027 चुनाव का पूरा गणित.

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प्रयागराज की शहर पश्चिमी विधानसभा सीट, जिसे कभी माफिया अतीक अहमद का अभेद्य किला माना जाता था, अब 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए एक नए सियासी रणक्षेत्र में तब्दील हो चुकी है. यूपी Tak की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, इस सीट के समीकरण अब अतीक के नाम से आगे बढ़ चुके हैं. अतीक अहमद इस सीट से 5 बार विधायक रहा था. उसके बाद उसका भाई अशरफ भी यहां से जीता. पिछले दो चुनावों (2017 और 2022) से बीजेपी के सिद्धार्थनाथ सिंह यहां से विधायक हैं. अतीक और अशरफ की हत्या के बाद, यह पहली बार होगा जब विधानसभा चुनाव में अतीक का नाम एक सक्रिय मुद्दे या डर के रूप में मौजूद नहीं होगा. 

2024 लोकसभा चुनाव के बदलते संकेत

2024 के लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस-सपा गठबंधन के उज्जवल रमण सिंह को 6000 वोटों की बढ़त मिली थी. यह बीजेपी के लिए चिंता का विषय है. 

जातीय समीकरण और चुनौतियां

मुस्लिम वोटर: करीब 1 लाख मुस्लिम मतदाता यहां निर्णायक भूमिका में हैं. अतीक की हत्या के बाद गद्दी समाज का रुख किसके साथ होगा, यह बड़ा सवाल है. 
पीडीए (PDA) बनाम लाभार्थी: सपा 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले पर भरोसा कर रही है, खासकर पासी समुदाय (50,000) और यादव (25,000) मतदाताओं के जुड़ाव पर. बीजेपी अपने 'सबका साथ सबका विकास' और विकास कार्यों के दम पर यहाँ तीसरी बार जीत दर्ज करने की कोशिश में है. पूर्व सपा नेता रिचा सिंह और पूजा पाल (जो अब बीजेपी के करीब हैं) भी समीकरण बदल सकती हैं. 

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बीजेपी की तरफ से इस सीट पर सिद्धार्थनाथ सिंह की मजबूत दावेदारी है. ऋचा सिंह के बीजेपी में जाने के बाद सपा के पास एक मजबूत चेहरे की तलाश है. इसी बीच अमरनाथ मौर्य का नाम चर्चा में है. प्रयागराज शहर पश्चिमी में अब 'आतंक बनाम विकास' की पुरानी लड़ाई 'जातीय गोलबंदी बनाम सरकार के काम' की दिशा में मुड़ती दिख रही है.