आज का यूपी: OBC आयोग की वजह यूपी में इस साल नहीं हो पाएंगे प्रधानी, पंचायत चुनाव? बिग अपडेट
UP Panchayat Election 2026: यूपी में पंचायत चुनाव टलने के आसार, इसके कारण आए सामने! जानिए क्यों पिछड़ा वर्ग आयोग के चक्कर में फंसा चुनाव. उधर नसीमुद्दीन सिद्दीकी और फूल बाबू थाम रहे अखिलेश यादव का हाथ. इस पॉलिटिक्स को भी समझिए.

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में दो बड़ी खबरें चर्चा का विषय बनी हुई हैं. पहली पंचायत चुनाव का टलना और दूसरी बड़े मुस्लिम चेहरों का सपा में शामिल होना. अपने खास शो आज का यूपी में हम पहले बात करेंगे पंचायत चुनावों की.
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव, जो फरवरी-मार्च 2026 में होने वाले थे, अब टलते नजर आ रहे हैं. इसका मुख्य कारण पिछड़ा वर्ग आयोग (OBC Commission) का गठन न होना है. हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें कहा गया कि बिना पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और नए आरक्षण के चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं.
सरकार ने भी स्वीकार किया कि आयोग का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में खत्म हो गया था. माना जा रहा है कि पार्टियां भी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पंचायत चुनाव का 'बवाल' और आपसी गुटबाजी नहीं झेलना चाहतीं. इसलिए अब ये चुनाव अगले साल विधानसभा चुनाव के बाद ही होने की संभावना है.
अखिलेश यादव का बढ़ता कुनबा: नसीमुद्दीन सिद्दीकी की एंट्री
बसपा के पूर्व दिग्गज नेता और कभी मायावती के खास रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी है. अब वह समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल हो रहे हैं. उन्होंने यूपी Tak से बातचीत में इसके स्पष्ट संकेत दिए. पीलीभीत से बसपा के बड़े नेता और पूर्व मंत्री अनीस अहमद भी अखिलेश यादव का दामन थाम रहे हैं. पीलीभीत इलाके में उनका अपना मजबूत वोट बैंक माना जाता है. चर्चा है कि 15 फरवरी (शिवरात्रि के दिन) ये दोनों नेता आधिकारिक तौर पर सपा में शामिल हो सकते हैं.
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नसीमुद्दीन ने बताया कि कांग्रेस में रहते हुए उन्हें काम नहीं करने दिया गया. उन्होंने प्रियंका गांधी की टीम (संदीप सिंह) पर आरोप लगाया कि उन्हें 'बीमार' होने की हद तक खाली बिठाकर रखा गया. अखिलेश यादव इन पुराने दिग्गजों के जरिए बुंदेलखंड, पश्चिमी यूपी और तराई क्षेत्र में मुस्लिम और दलित वोटों के समीकरण को साधने की कोशिश कर रहे हैं.










