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दबदबा था, दबदबा है और दबदबा... बृजभूषण सिंह के फैंस ने बनाया था ये गाना इसपर अखिलेश यादव ने अब ये कहा

UP News: 'आज का यूपी' में देखें अखिलेश यादव का 2027 के लिए मास्टर प्लान और नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सपा में एंट्री का पूरा विश्लेषण. क्या नसीमुद्दीन बनेंगे सपा के नए फंड मैनेजर?

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Photo: Brijbhushan Sharan Singh and Akhilesh Yadav
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UP News: यूपी Tak का खास शो आज का यूपी राज्य की राजनीतिक हलचलों का सबसे सटीक विश्लेषण लेकर हाजिर है. आज के अंक में हम राज्य की तीन सबसे बड़ी खबरों का विश्लेषण करेंगे कैसे अखिलेश यादव 2027 के चुनाव के लिए फुल प्रूफ प्लान तैयार कर रहे हैं और बिहार की गलतियों से सबक ले रहे हैं. बसपा के पूर्व कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सपा में एंट्री के पीछे की असली 'डील' क्या है और क्या नसीमुद्दीन सपा के लिए फंड मैनेजर की नई भूमिका निभाएंगे?

अखिलेश यादव का फुल प्रूफ प्लान, बिहार की गलती से लिया सबक

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं. हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बाहुबली पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के समर्थकों द्वारा गाए गए गाने दबदबा था, दबदबा है और दबदबा रहेगा का जिक्र किया. अखिलेश ने इस गाने का वीडियो दिखाकर अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को सख्त हिदायत दी है.

दरअसल, अखिलेश यादव बिहार चुनाव में आरजेडी की उस गलती को नहीं दोहराना चाहते जहां विरोधियों ने जंगलराज और बाहुबल के वीडियो को मुद्दा बनाकर पासा पलट दिया था. अखिलेश ने साफ कर दिया है कि उनके समर्थक ऐसे कट्टा और दबदबा वाले गाने न बनाएं, ताकि बीजेपी को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घेराबंदी का मौका न मिले. उन्होंने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से भी अपील की है कि सपा को ऐसे विवादित प्रचार से दूर रखा जाए.

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 नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सपा में एंट्री, एसेट या लायबिलिटी?

बहुजन समाज पार्टी के पूर्व नंबर टू और मायावती के बेहद करीबी रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब आधिकारिक तौर पर समाजवादी बन चुके हैं. कांग्रेस में उपेक्षा का शिकार होने के बाद उन्होंने भारी लाव-लश्कर के साथ सपा का दामन थामा है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नसीमुद्दीन ने अखिलेश यादव के सामने कोई बड़ी शर्त नहीं रखी है, बल्कि खुद को पार्टी का वफादार सिपाही बताया है.  हालांकि, जानकारों का मानना है कि उनकी नजर आने वाले वक्त में खाली होने वाली राज्यसभा सीटों पर है. सपा को उम्मीद है कि नसीमुद्दीन के आने से मुस्लिम वोटों का बिखराव रुकेगा और ओवैसी या चंद्रशेखर आजाद जैसे फैक्टर कमजोर होंगे.

'फंड मैनेजर' की भूमिका और आजम खान फैक्टर

नसीमुद्दीन सिद्दीकी की एंट्री को लेकर सपा के भीतर एक और बड़ी चर्चा उनके मैनेजमेंट स्किल्स की है. बसपा के दौर में वे सबसे बड़े फंड मैनेजर माने जाते थे. चुनाव के वक्त पार्टी के लिए फंड जुटाने और संसाधनों का प्रबंधन करने में उनकी महारत सपा के लिए बड़ा एसेट साबित हो सकती है. 

साथ ही, यह भी कयास लगाए जा रहे थे कि क्या उन्हें आजम खान के विकल्प के तौर पर लाया गया है? विश्लेषण के अनुसार, नसीमुद्दीन का स्वभाव बेहद विनम्र है और वे आजम खान के साथ टकराव के बजाय तालमेल बिठाने में सक्षम हैं. उनका प्रभाव क्षेत्र भी आजम खान के मुरादाबाद मंडल से अलग है. फिलहाल अखिलेश के सामने चुनौती नसीमुद्दीन के बेटे अफजल सिद्दीकी को सियासी तौर पर सेट करने और नसीमुद्दीन के पुराने समर्थकों को संगठन में जगह देने की होगी.

यहां देखें पूरा वीडियो

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