BJP कार्यकर्ताओं से बोले स्वतंत्र देव, ‘हम राजनीति में फॉर्च्यूनर से कुचलने को नहीं आए’

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लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) लगातार विपक्ष के निशाने पर है. इस बीच, 10 अक्टूबर को यूपी बीजेपी अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने अल्पसंख्यक मोर्चा की मीटिंग में पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा, “हम राजनीति में लूटने के लिए नहीं हैं और ना ही किसी को फॉर्च्यूनर से कुचलने के लिए आए हैं.” साथ ही उन्होंने कहा कि आपको देखकर जनता मुंह न फेरे ऐसा आचरण कीजिए.

स्वतंत्र देव सिंह ने और क्या कहा?

यूपी बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा की कार्यसमिति का आयोजन लखनऊ के साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में किया गया था. इसके उद्घाटन सत्र में यूपी बीजेपी अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने अल्पसंख्यकों के लिए पार्टी की नीतियों और सरकार की योजनाओं का जिक्र किया, तो एक ऐसी भी बात कह दी कि जिसके बड़े मायने निकले जा रहे हैं.

इस दौरान स्वतंत्र देव सिंह ने कहा, “हम राजनीति में लूटने नहीं आए हैं, किसी को फॉर्च्यूनर से कुचलने नहीं आए हैं…वोट आपके व्यवहार से मिलेगा. अगर जिस मोहल्ले में आप रहते हैं वहां 10 लोग आपकी प्रशंसा करते हैं तो मेरा सीना चौड़ा हो जाएगा. ये नहीं कि जिस मोहल्ले में रहते हैं लोग आपकी शक्ल से छिप जाएं.”

देखा जाए तो यूपी बीजेपी के मुखिया का ये अपने कार्यकर्ताओं को संदेश है और नसीहत भी है. साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं के आचरण को लेकर चिंता भी है. मगर इस बयान के बड़े मायने हैं.

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बयान के क्या हैं मायने?

दरअसल, यूपी बीजेपी अध्यक्ष की तरफ से ये नसीहत ऐसे समय आई है, जब लखीमपुर खीरी हिंसा मामले पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद पार्टी को किसी तरह डैमेज कंट्रोल करना है.

एक तरफ विपक्ष को बैठे बिठाए बड़ा मुद्दा मिल गया है, दूसरी तरफ बीजेपी भी बैकफुट पर दिखाई पड़ रही है. भले ही पार्टी इस बात को खुले तौर पर जाहिर न करे, पर चुनाव में कुछ ही वक्त रह गया है, ऐसे में पार्टी के लिए इस मामले को नजरअंदाज करना भी आसान नहीं है. आशीष मिश्रा खुद भी बीजेपी के सदस्य हैं और युवा मोर्चा के अवध क्षेत्र के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं. इसलिए भी आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद से पार्टी पर दबाव है.

मुद्दा किसानों से भी जुड़ा हुआ है. किसानों को साधने को लेकर पार्टी पहले से रणनीति बना रही थी. ऐसे में चुनाव करवाने की जिम्मेदारी अपने कंधे पर उठाए प्रदेश अध्यक्ष के लिए ये बेचैनी और चिंता का सबब भी है.

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