SIR का फॉर्म भरने में BLO को आ रही ये सारी परेशानी, 4 दिसंबर की डेडलाइन में इसे पूरा करना बना बड़ा चैलेंज
देशभर में मतदाताओं से एसआईआर फॉर्म भरवाने की डेडलाइन 4 दिसंबर रखी गई है. एसआईआर को लेकर अमेठी में भी तेजी से काम किया जा रहा है. सभी अधिकारी और कर्मचारी तय समय में इसे पूरा करने में लगे हैं. इस बीच ड्यूटी पर तैनात कुछ महिला BLO ने अपनी परेशानी बताई है.
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देशभर में मतदाताओं से एसआईआर फॉर्म भरवाने की डेडलाइन 4 दिसंबर रखी गई है. एसआईआर को लेकर अमेठी में भी तेजी से काम किया जा रहा है. सभी अधिकारी और कर्मचारी तय समय में इसे पूरा करने में लगे हैं. इस बीच ड्यूटी पर तैनात कुछ महिला BLO ने अपनी परेशानी बताई है. महिलाओं का कहना है कि एसआईआर की प्रकिया को पूरा करने के लिए समय काफी कम है इसे आगे बढ़ा देना चाहिए. बता दें कि अमेठी में अभी तक 54 प्रतिशत एसआईआर का काम पूरा हो चुका है. लेकिन निर्धारित 5 दिनों में इसे पूरा कर पाना एक बड़ी चुनौती है.
4 दिसंबर तक पूरा हो पाएगा SIR का काम
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर अभियान लगातार चर्चाओं में बना हुआ है.इस दौरान कई BLO की मौत भी हो चुकी है. 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलने वाली SIR की इस प्रक्रिया में बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) घर-घर जाकर डिटेल जुटा रहे हैं. लेकिन इस प्रक्रिया में उन्हें कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा रहा है. क्योंकि अधिकारियों के पास काम ज्यादा है और समय कम. इस बीच कुछ ग्रामीण अमेठी के खेरौना बूथ पर खुद ही अपना एसआईआर का फॉर्म भरने पहुंच गए. इस दौरान ग्रामीणों ने बताया की 'अभी तक फॉर्म हमारे पास नहीं पहुंचा है. हम लोग अपना आधार कार्ड लेकर खुद इस विषय की जानकारी लेने के लिए आए हुए हैं ताकि हमारा नाम वोटर लिस्ट से ना कट जाए.
चाय ब्रेड खाकर काम करने को मजबूर हुए BLO?
वहीं बूथ पर एसआईआर का फॉर्म भर रहीं बीएलओ अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि 'हम विधवा हैं और हमारा एक 22 साल का लड़का है जो मानसिक रूप से बीमार रहता है. लेकिन हम सब कुछ छोड़कर इस काम में जुटे हुए हैं. सुबह 3 बजे से रात 12 बजे तक काम कर रहे हैं और ब्रेड चाय पीकर दिन बिता रहे हैं. हमारी मांग है कि फॉर्म भरने की तारीख आगे बढ़नी चाहिए जिससे हम लोगों को सहूलियत मिल सके.'
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वहीं बूथ पर एसआईआर का काम कर रहीं सहायक अध्यापिका सुनीता गुप्ता ने बताया की इस काम के चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है. अब पूरा दिन इसी काम में बीत जा रहा है. ऐसे में बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं.
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