कानपुर वाले करौली बाबा की 2 शादियों की कहानी, पहली वाली पत्नी के साथ क्या हुआ, जानिए

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कानपुर का करौली बाबा आश्रम (Karauli Baba) पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चाओं में बना हुआ है. कारण है करौली आश्रम के बाबा संतोष सिंह भदौरिया. बाबा के ऊपर एक डॉक्टर ने मारपीट का आरोप लगाया है. जानकारी के मुताबिक, डॉक्टर ने बाबा को चमत्कार की चुनौती दी. इसपर बाबा और डॉक्टर के बीच विवाद हो गया. डॉक्टर के आरोप के मुताबिक, बाबा ने अपने सेवादारों के हाथों उसे पिटवा दिया. पर आपके दिमाग में भी आया होगा कि आखिर ये करौली आश्रम के बाबा संतोष सिंह भदौरिया हैं कौन? ये अचानक चर्चाओं में कैसे आ गए और कैसे पिछले कुछ सालों में ही इनका नाम लोगों की जुबान पर आने लगा? आखिर कैसे कुछ सालों के अंदर ही इन्होंने करोड़ों-अरबों का साम्राज्य खड़ा कर लिया?

आखिर कौन हैं करौली बाबा

करौली आश्रम के बाबा संतोष सिंह भदौरिया उन्नाव के पवई गांव से संबंध रखते हैं. कुछ साल पहले तक लोग इन्हें सिर्फ संतोष सिंह भदौरिया के नाम से जानते थे. तब तक इनके नाम के आगे ‘बाबा’ नहीं लगा था. काफी मेहनत की. मगर संतोष सिंह भदौरिया की किस्मत साथ नहीं दे रही थी. परिवार में गरीबी भी थी तो समस्याएं बड़ी थी.

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किस्मत बदल जाए तो की शादी मगर फिर पत्नी को ही मनहूस मान ये किया

संतोष सिंह भदौरिया की किस्मत साथ नहीं दे रही थी. काफी हाथ-पैर मारने के बाद भी संतोष सिंह को सफलता हाथ नहीं लग रही थी. इनके बारे में बताया जाता है कि इन्हें कम समय में बहुत पैसा कमाना था. कहते हैं शादी के बाद किस्मत बदल जाती है. यही सोच संतोष सिंह भदौरिया ने एक युवती से शादी कर ली. मगर संतोष सिंह की किस्मत ने फिर भी साथ नहीं दिया.

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संतोष सिंह भदौरिया को लगने लगा कि उनकी माली हालत और बदकिस्मती की जिम्मेदार उनकी पत्नी ही है. वह अपनी पत्नी को मनहूस मानने लगे. फिर क्या था, संतोष सिंह भदौरिया 3 साल के अंदर ही अपनी पत्नी से अलग हो गए.

आज बड़े-बड़े चमत्कार का दावा करने वाले, पत्नी-पति के बीच झगड़े को खत्म करने का दावा करने वाले बाबा संतोष सिंह भदौरिया कभी अपनी ही पत्नी को मनहूस मानकर उससे अलग हो गए थे. ये जानकर आप भी हैरान रह गए होंगे.

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फिर की दूसरी शादी

संतोष सिंह भदौरिया पहली पत्नी से अलग हो गए. इसके कुछ ही समय बाद उन्होंने ममता तिवारी नाम की युवती से दूसरी शादी कर ली. कहते हैं कि ममता का परिवार संतोष सिंह के परिवार से आर्थिक तौर पर काफी मजबूत था. इस शादी से संतोष सिंह के 2 बेटे हुए.

पत्नी के परिवार से मिला टेम्पो चलाया

बताया जाता है कि पत्नी के परिवार वालों से संतोष सिंह को एक टेम्पो मिला. संतोष सिंह ने टेम्पो चलाया. मगर उन्हें तो कम समय में काफी पैसे कमाने थे. इसकी चाहत ने संतोष सिंह की जिंदगी में कई बदलाव लाए.

बाबागिरी से पहले नेतागिरी भी की मगर…

संतोष सिंह भदौरिया  इसके बाद शिवसेना में शामिल हो गए. मगर यहां भी उन्हें खाली हाथ ही रहना पड़ा. इसके बाद संतोष सिंह  भारतीय किसान यूनियन में शामिल हुए. यहां संतोष सिंह नेता बन गए. कहा जाता है कई मौकों पर इन्होंने जमकर लाठियां खाई और प्रदर्शनों में काफी हिस्सा लिया.

हत्याकांड में आया नाम

संतोष सिंह के मन को शांति नेतागिरी से भी नहीं मिल रही थी. इसके बाद इन्होंने जमीन खरीदने और बेचने का काम शुरू कर दिया. कहा जाता है कि इस दौरान इन्होंने कई लोगों से दुश्मनी ली. इस दौरान संतोष सिंह का नाम 1992 में हुए एक हत्याकांड में भी सामने आ गया. कानपुर के फजलगंज में 1992 में अयोध्या प्रसाद नाम के शख्स की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी.

संतोष सिंह का नाम भी इस केस में सामने आया. वह जेल भी गए. मगर फिर बेल पर बाहर आ गए. इसके बाद संतोष केरल चले गए. कहा जाता है कि केरल में संतोष ने कई थैरेपी सीखी. फिर कानपुर आकर अपना क्लिनिक खोल लिया. यहां वह बीमारियों के इलाज का दावा करने लगे.

अचानक बन गए करौली बाबा

एक दिन अचानक संतोष सिंह भदौरिया ने करौली नाम के गांव में आश्रम खोल लिया. आश्रम का प्रारंभ एक मंदिर निर्माण के साथ किया गया. प्रारंभ में यह छोटा आश्रम था. मगर कुछ ही सालों में ये आश्रम एक छोटे कस्बे के तौर पर उभर गया और करौली नाम चर्चाओं में आ गया.

चमत्कार का दावा और सोशल मीडिया की ताकत

बता दें कि आश्रम में संतोष सिंह भदौरिया द्वारा गंभीर बीमारियों के इलाज की बातें कही जाने लगी. धीरे-धीरे लोगों में यह बात फैलती चली गई. अचानक संतोष सिंह भदौरिया, करौली आश्रम के बाबा संतोष सिंह भदौरिया बन गए. इसके बाद बाबा ने सोशल मीडिया की ताकत का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया.

बाबा ने यूट्यूब से अपनी खूब पब्लिसिटी की. यहां से बाबा संतोष सिंह भदौरिया की किस्मत पूरी तरह से बदल गई. कहा जाता है कि आज बाबा करोड़ों-अरबों के मालिक हैं. एक से एक रॉयल गाड़ी से चलते हैं. देखते ही देखते टोम्पो चलाने वाले संतोष सिंह भदौरिया करौली आश्रम के बाबा बन गए.

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