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11वें फ्लोर पर रहने वाली ईशा ने गाजियाबाद की 3 बहनों के घर के अंदर की सारी कहानी बता दी, उन्हें क्या दिखा?

गौरव कुमार पांडेय

Neighbour Isha: गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में तीन बहनों की आत्महत्या के मामले में UP Tak की ग्राउंड रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. पड़ोसियों के अनुसार देर रात भारी आवाज सुनने के बाद जब उन्होंने नीचे देखा तो वहां तीन मासूमों के शव पड़े थे. बताया जा रहा है कि बच्चियां लंबे समय से स्कूल नहीं जा रही थीं और पूरी तरह सामाजिक रूप से कटी हुई थीं.

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Ghaziabad News: Isha
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गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में तीन सगी बहनों द्वारा नौवीं मंजिल से कूदकर जान देने के मामले में अब नए और चौंकाने वाले पहलू सामने आ रहे हैं. यूपी Tak की टीम ने घटना स्थल पर पहुंचकर पड़ोसियों से बात की, जिन्होंने परिवार की पृष्ठभूमि और बच्चों के व्यवहार को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं. 

1वीं मंजिल पर रहने वाली पड़ोसिन ईशा ने बताया कि रात करीब 2:00 बजे उन्हें ऐसी आवाज सुनाई दी जैसे किसी ने ऊपर से भारी अलमारी फेंकी हो. जब उन्होंने बालकनी से झांका, तो नीचे तीन बच्चियों के शव पड़े थे.

ईशा से हुई इस पूरी बातचीत को यहां नीचे देखा जा सकता है. 

पूरी सोसाइटी इस घटना से स्तब्ध है. लोगों का कहना है कि एक साथ तीन बच्चियों का ऐसा कदम उठाना किसी एक्सीडेंट या साधारण डिप्रेशन जैसा नहीं लगता. पड़ोसियों के अनुसार, बच्चियों के पिता की दो पत्नियां थीं. मृतक तीन बहनें पहली पत्नी की बेटियां थीं. कुल मिलाकर दोनों पत्नियों से पांच बच्चे थे. यह भी जानकारी सामने आई है कि दूसरी पत्नी का एक बच्चा मानसिक रूप से दिव्यांग है. बच्चियां कोरोना काल के बाद से स्कूल नहीं जा रही थीं और घर में ही रहती थीं. वे सोसाइटी के किसी भी सांस्कृतिक या सामाजिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेती थीं. 

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पड़ोसियों का मानना है कि बच्चियां किसी कोरियन लव गेम या डार्क वेब का शिकार हुई थीं. यह गेम शुरू में सकारात्मक लगता है लेकिन धीरे-धीरे 'सेल्फ-डिस्ट्रक्शन' (आत्म-विनाश) की ओर ले जाता है. पड़ोसन ने ये भी बताया कि ये बच्चियां उनके घर कन्या भोज (कंचक) में आई थीं और तब वे बिल्कुल सामान्य बच्चों की तरह व्यवहार कर रही थीं. घटना के समय अंदर का दरवाजा बंद था, जिसे तोड़कर परिजन अंदर पहुंचे. इससे संकेत मिलता है कि यह एक सोची-समझी प्लानिंग थी.

पड़ोसियों ने पैरेंटिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज के डिजिटल युग में पेरेंट्स को बच्चों की मोबाइल गतिविधियों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए ताकि वे ऐसे 'डार्क वेब' स्कैम्स में न फंसें. वर्तमान में फॉरेंसिक टीम और पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है.

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