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कुंडा की सीट पर 2027 में ये है राजा भैया के लिए सबसे बड़ा खतरा! कम हो रहा ये फर्क बढ़ाएगा टेंशन

रजत सिंह

Raja Bhaiya Politics: कुंडा विधानसभा में रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का दबदबा 1993 से बरकरार है. लगातार सात बार जीत दर्ज कर उन्होंने कुंडा को अपना गढ़ बनाया. उनके करिश्मा, मजबूत जनसमर्थन और जातीय समीकरण जीत की कुंजी रहे. हालांकि 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने चुनौती दी थी. 2027 में कड़ी टक्कर संभव है.

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Raja Bhaiya Politics:कुंडा विधानसभा से जुड़ी राजनीति में रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया का दबदबा आज भी बरकरार है. उन्होंने लगातार चुनाव जीते हैं और उनकी लोकप्रियता का श्रेय उनके करिश्मा, जातीय समीकरण और मजबूत जन समर्थन को दिया जाता है. हालांकि 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के गुलशन यादव ने काफी ताकत दिखाई जिससे उनके वोटों का अंतर कम हो गया है. आगामी 2027 के चुनाव में दोनों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है. साथ ही राजा भैया के दोनों बेटे भी राजनीति में सक्रिय हुए हैं जो इस सीट पर प्रभाव डाल सकते हैं.स्थानीय गठबंधन और प्रत्याशियों के चयन के आधार पर चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकता है.

2022 में गुलशन यादव ने दी थी टक्कर

1993 से 2022 तक राजा भैया का एकतरफा राज चला. वे निर्दलीय या अपनी पार्टी के टिकट पर लगातार सात बार जीते हैं. लेकिन 2024 लोकसभा चुनावों में कहानी थोड़ी बदली. राजा भैया के प्रभाव से आसपास की राजनीति प्रभावित हुई. खासकर कौशांबी और प्रतापगढ़ क्षेत्र में. पहले समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव के साथ सहयोग रहे.लेकिन वे हमेशा निर्दलीय ही जीते. 1993 से 2022 तक कुंडा में उनका नाम ही छाया रहा.राजा भैया का करिश्मा हमेशा लाख-डेढ़ लाख वोटों के अंतर से जीत दिलाता था. लेकिन 2022 में सपा ने उनके खिलाफ उनके पूर्व करीबी गुलशन यादव को उतारा. नतीजा? जीत का अंतर घटकर करीब 30315 वोट रह गया. राजा भैया ने 99,612 वोट (50.58%) से जीत दर्ज की. जबकि गुलशन यादव को 69,297 वोट मिले. यह उनकी लगातार सातवीं जीत थी.लेकिन मार्जिन में बड़ी कमी आई.

ऐसे में 2022 के चुनाव ने राजा भैया के लिए खतरे की घंटी बजा दी है.अब राजा भैया राष्ट्रवाद की ओर झुकते दिखते हैं और बीजेपी के नजदीक आ रहे हैं. अखिलेश यादव से उनकी अदावत पुरानी है.अखिलेश ने एक बार कुंडा में कहा था कि 'कुंडा में कुंडी लगा देंगे.' राजा भैया ने जवाब दिया था कि 'कुंडा में कुंडी लगाने वाला कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ.'

2027 की तैयारी: क्या होगा कुंडा का भविष्य?

अब 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी जोरों पर है. दोनों तरफ से लगातार जीत के दावे किए जा रहे हैं. राजा भैया के समर्थक कहते हैं कि उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में मजबूती से लड़ेंगे. वहीं उनके दो बेटे बृजराज और शिवराज भी अब खुलकर राजनीति में सक्रिय हो चुके हैं. परिवार पूरी ताकत से मैदान में है.दूसरी तरफ सपा का दावा है कि गुलशन यादव ने 2022 में अंतर 1 लाख से घटाकर 30 हजार किया. अगली बार यह अंतर खत्म हो जाएगा और सपा कुंडा पर कब्जा करेगी. अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा सरकार बनेगी.