बीडा क्षेत्र के लिए 23590 एकड़ जमीन का अधिग्रहण, बुंदलेखंड की तस्वीर बदलने वाले काम शुरू
योगी सरकार बुंदेलखंड की तस्वीर बदलने के लिए बीडा (BIDA) परियोजना के तहत 56,000 एकड़ से अधिक भूमि पर औद्योगिक गलियारा विकसित कर रही है. नोएडा की तर्ज पर बन रहे इस मेगा प्रोजेक्ट में BEML ₹600 करोड़ का निवेश कर रक्षा उपकरण और भारी मशीनरी की इकाइयां लगाएगा.
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उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की किस्मत बदलने की दिशा में योगी सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (BIDA) के अंतर्गत औद्योगिक विस्तार के लिए 23,590 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है. सरकार ने इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए कुल 56,662 एकड़ भूमि को औद्योगिक विकास के लिए औपचारिक मंजूरी दे दी है. यह परियोजना न केवल बुंदेलखंड के आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करेगी, बल्कि इसे निवेश और रोजगार का नया 'पावरहाउस' बनाने की तैयारी है.
बीईएमएल (BEML) लाएगा ₹600 करोड़ का निवेश
बुंदेलखंड में औद्योगिक गतिविधियों को धरातल पर उतारने के लिए देश की दिग्गज कंपनी भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) ने हाथ आगे बढ़ाया है. कंपनी ने बीडा क्षेत्र में लगभग ₹600 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिया है. इस निवेश के तहत रक्षा उपकरण, भारी मशीनरी और औद्योगिक उत्पादों के निर्माण की इकाइयां लगाई जाएंगी. इससे रक्षा और विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और हजारों स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे क्षेत्र से होने वाला पलायन रुकेगा.
100 एकड़ में बनेगा हाई-टेक लॉजिस्टिक्स पार्क
माल ढुलाई और सप्लाई चेन को सुगम बनाने के लिए बीडा क्षेत्र में 100 एकड़ भूमि पर एक अत्याधुनिक मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित किया जाएगा. इसका निर्माण कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (कॉनकोर) द्वारा किया जाएगा. यह पार्क सड़क और रेल नेटवर्क के बीच एक मजबूत कड़ी बनेगा. इससे उद्योगों की परिवहन लागत कम होगी और बुंदेलखंड से उत्पादों का निर्यात करना आसान हो जाएगा.
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नोएडा की तर्ज पर विकास की रणनीति
योगी सरकार का विजन बुंदेलखंड को केवल कच्चे संसाधनों का क्षेत्र न रखकर इसे एक एकीकृत औद्योगिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित करना है. क्षेत्र में चौड़ी सड़कें, निर्बाध बिजली आपूर्ति, जलापूर्ति और आधुनिक वेयरहाउसिंग की व्यवस्था की जा रही है. बड़े उद्योगों के साथ-साथ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) और स्टार्टअप्स के लिए भी अलग से कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे. निवेशकों को किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम और तेजी से प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है.
रोजगार और आत्मनिर्भर बुंदेलखंड
बीडा परियोजना को 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' के मॉडल के रूप में देखा जा रहा है. अधिकारियों का मानना है कि जैसे नोएडा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली, वैसे ही बीडा आने वाले समय में बुंदेलखंड के हर हाथ को काम और हर खेत को बाजार से जोड़ने का माध्यम बनेगा. रक्षा उत्पादन और भारी उद्योग के आने से इस क्षेत्र की पहचान वैश्विक स्तर पर बदलने वाली है.
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