UP Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में अखिलेश यादव के 'चवन्नी' वाले बयान पर भारी घमासान मच गया है. समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने अखिलेश के बयान को न सिर्फ अपने ऊपर हमला माना है, बल्कि इसे पूरे जाट समाज के अपमान से भी जोड़ दिया है. कभी एक-दूसरे के बेहद करीबी रहे अखिलेश और जयंत के बीच यह जुबानी जंग अब जाट सम्मान बनाम सियासी अहंकार की लड़ाई बन चुकी है.
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अखिलेश का 'चवन्नी' वाला विवादित बयान
यह पूरा बवाल कुछ दिन पहले लखनऊ में शुरू हुआ था. एक कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने गठबंधन के साथियों पर निशाना साधते हुए कहा था कि समाजवादी पार्टी ने अपने सहयोगियों को पूरा सम्मान दिया, लेकिन वे फिर भी साथ छोड़कर चले गए. अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा था, 'हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, तब भी हमें छोड़कर चले गए.' हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन लोगों ने इसे सीधे जयंत चौधरी से जोड़कर देखा.
जयंत चौधरी ने दिया करारा जवाब
अखिलेश यादव के इस तंज पर जयंत चौधरी और उनके समर्थक बुरी तरह भड़क गए. जयंत ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर सियासत में इतने सस्ते शब्द ही बोलने थे, तो सीधा मेरा नाम लेकर बोल देते. जयंत ने अखिलेश पर तंज कसते हुए कहा कि जाट समाज को निशाना बनाना और यह सोचना कि 'हमने एबीसीडी सिखाई है', यह बहुत बड़ा अहंकार है. उन्होंने कहा कि उन्होंने इस अहंकार को बहुत करीब से देखा है और ऐसा आचरण हमेशा पतन (गिरावट) ही लाता है.
2024 चुनाव से पहले टूटा गठबंधन
पश्चिमी यूपी में जाट और मुस्लिम वोट बैंक हमेशा से बहुत अहम रहा है. 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और आरएलडी ने मिलकर चुनाव लड़ा था और बीजेपी की मुश्किलें काफी बढ़ा दी थीं. दोनों ने खतौली उपचुनाव में भी अच्छी कामयाबी हासिल की थी. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले मुजफ्फरनगर और हाथरस जैसी सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों पार्टियों में अनबन हो गई, जिसके बाद यह गठबंधन टूट गया.
भारत रत्न के बाद बदले समीकरण
गठबंधन टूटने के पीछे एक और बड़ी घटना सामने आई. दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री और बड़े किसान नेता चौधरी चरण सिंह को 'भारत रत्न' देने का ऐलान किया. जयंत चौधरी ने इस सम्मान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार का दिल से आभार जताया. इसके तुरंत बाद, 12 फरवरी 2024 को जयंत ने सपा और इंडिया गठबंधन का साथ छोड़कर एनडीए (NDA) का हाथ थाम लिया. चुनाव के बाद जयंत चौधरी केंद्र सरकार में मंत्री भी बन गए.
खुद जयंत ने कहा था- चवन्नी नहीं
सियासत में 'चवन्नी' शब्द का जिक्र सबसे पहले खुद जयंत चौधरी ने ही किया था. 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद जब उनके बीजेपी में जाने की चर्चाएं बहुत तेज थीं, तब अमित शाह भी उन्हें अपने पाले में लाना चाहते थे. उस दौरान जयंत चौधरी ने मीडिया के सामने कहा था, 'मैं कोई चवन्नी नहीं हूं, जो पलट जाऊंगा.' अब उसी चवन्नी को लेकर सपा और आरएलडी आमने-सामने हैं. अब यह देखना होगा कि यह जुबानी जंग सिर्फ बयानों तक सीमित रहती है या फिर पश्चिमी यूपी की राजनीति में कोई बड़ा फेरबदल करती है.
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