Pundrik Maharaj: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इन दिनों अपनी एक खास मुलाकात को लेकर काफी चर्चा में हैं. हाल ही में वह मथुरा में आध्यात्मिक गुरु गोस्वामी पुंडरीक महाराज से मिलने पहुंचे थे. यह मुलाकात इसलिए खास बन जाती है क्योंकि कुछ समय पहले खुद अखिलेश यादव ने पुलिस द्वारा पुंडरीक महाराज को दिए गए 'गॉर्ड ऑफ ऑनर' पर बड़े सवाल खड़े किए थे. अब इस मुलाकात को अखिलेश यादव की 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.
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अखिलेश यादव ने लिया आशीर्वाद
मथुरा में एक कथा के दौरान अखिलेश यादव पुंडरीक महाराज से मिलने पहुंचे. मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि वह स्वामी जी का आशीर्वाद लेने आए हैं. अखिलेश ने कहा कि साधु-संत हमारी धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाते हैं. इसके साथ ही उन्होंने बिना नाम लिए उन लोगों पर निशाना भी साधा जो बड़े पदों पर बैठकर भारतीय परंपराओं को नहीं मान रहे हैं.
दिसंबर 2025 का पुलिस सलामी विवाद
दिसंबर 2025 में बस्ती पुलिस लाइन में पुंडरीक महाराज का एक कार्यक्रम था, जहां उन्हें पुलिस ने सलामी दी थी. तब अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि जब पुलिस महकमा सलामी में व्यस्त रहेगा, तो प्रदेश का अपराधी मस्त रहेगा. इस घटना पर मायावती और चंद्रशेखर आजाद ने भी सवाल खड़े किए थे. इस मामले में विवाद बढ़ने पर पुलिस ने सफाई देकर कहा था डिप्रेशन का शिकार हो रहे पुलिसकर्मियों को तनाव से निकालने के लिए महाराज जी को बुलाया गया था.
ऑक्सफोर्ड से पढ़े हैं पुंडरीक महाराज
पुंडरीक महाराज वृंदावन के एक बहुत ही धार्मिक और प्रभावशाली परिवार से आते हैं. उनके पिता श्रीभूति कृष्ण गोस्वामी और दादा श्री अतुल कृष्ण गोस्वामी भी जाने-माने आध्यात्मिक वक्ता रहे हैं. पुंडरीक महाराज अपनी पारिवारिक परंपरा के 38वें आचार्य हैं. उन्होंने मात्र 7 साल की उम्र में अपना पहला सार्वजनिक भाषण दिया था. दिल्ली यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र की पढ़ाई करने के बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए ऑक्सफोर्ड चले गए थे.
20 की उम्र में बने गुरु
पुंडरीक महाराज ने 'टेड टॉक्स' में अपने जीवन के बारे में बताया था कि जब वह 20 साल के थे, तब उनके 38 वर्षीय पिता का अचानक निधन हो गया था. पिता की मौत के बाद उन्हें इंग्लैंड से वापस लौटना पड़ा. उन्होंने बताया कि पिता के शव को लाते समय ही उनका सफर आध्यात्म की ओर पूरी तरह मुड़ गया था. आज पुंडरीक महाराज काफी मशहूर हैं और लोग देश-विदेश में उन्हें सुनने के लिए बुलाते हैं.
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