UP चुनाव 2027: राहुल गांधी का 'दलित कार्ड', कांशीराम के लिए भारत रत्न की मांग, क्या मायावती के किले में लगेगी सेंध?

Kanshi Ram Bharat Ratna: क्या 2027 के चुनाव से पहले राहुल गांधी ने सही चाल चल दी है? कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग और कांग्रेस की दलितों की ओर वापसी की कोशिशों का उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या होगा असर? देखिए विस्तृत रिपोर्ट.

कुमार अभिषेक

• 06:40 PM • 16 Mar 2026

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी अभी से जोर पकड़ने लगी है, और इस बार सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के निशाने पर दलित वोट बैंक, विशेष रूप से जाटव समुदाय है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा कांशीराम को 'भारत रत्न' देने की मांग और उनके दलित विमर्श ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है. राहुल गांधी ने लखनऊ में कांशीराम को एक महान नेता बताया और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उन्हें 'भारत रत्न' देने की मांग की. राहुल गांधी ने दबी जुबान में स्वीकार किया कि कांग्रेस के शासनकाल में दलितों को वह सम्मान और अधिकार नहीं मिले जिसके वे हकदार थे. 

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उन्होंने यहां तक कहा कि "अगर जवाहरलाल नेहरू जीवित होते, तो कांशीराम कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते." कांग्रेस का मानना है कि यदि उनका पुराना दलित वोट बैंक (जो कांशीराम के उदय से पहले उनके साथ था) वापस लौट आता है, तो 2027 में उनकी स्थिति बहुत मजबूत हो जाएगी.

बसपा और आकाश आनंद का पलटवार

इसके बाद मायावती ने प्रेस रिलीज जारी कर कांग्रेस को उनके दिन याद दिलाए. उन्होंने सवाल किया कि जब कांशीराम का निधन हुआ था, तब केंद्र की कांग्रेस सरकार ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक क्यों नहीं घोषित किया था? आकाश आनंद ने इसे कांग्रेस की 'वोट बैंक की राजनीति' करार दिया और कहा कि कांग्रेस ने हमेशा दलितों का शोषण किया है और अब चुनाव नजदीक देखकर उन्हें कांशीराम याद आ रहे हैं. 

उत्तर प्रदेश का दलित वोट बैंक 

उत्तर प्रदेश में लगभग 20-22% दलित आबादी है, जिसमें जाटव समुदाय सबसे प्रभावशाली है. वर्तमान में मायावती के पास इस वोट बैंक का लगभग 9% हिस्सा सुरक्षित माना जाता है, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में इस वोट बैंक में बिखराव देखा गया था (विशेषकर 'संविधान बचाओ' विमर्श के कारण). 

अन्य दलों की स्थिति (SP & BJP)

अखिलेश यादव पिछले कुछ समय से कांशीराम और मुलायम सिंह यादव की जयंतियों को एक साथ मनाकर दलित-पिछड़ा (PDA) गठजोड़ मजबूत करने में जुटे हैं. भाजपा के भीतर के दलित नेता भी कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग उठा रहे हैं ताकि वे इस बड़े वोट बैंक को अपने पाले में बनाए रख सकें. 

2027 का राजनैतिक समीकरण

कांग्रेस को उम्मीद है कि मुस्लिम वोट बैंक पहले ही उनके साथ लौट चुका है, और यदि दलितों का साथ मिल गया, तो यह गठबंधन अजेय हो सकता है. 2027 के लिए मायावती पहले से अधिक सक्रिय नजर आ रही हैं, जो सपा और कांग्रेस गठबंधन के लिए चुनौती बन सकती है.