ज्ञानपुर विधानसभा सीट पर कभी विजय मिश्रा का एकछत्र राज हुआ करता था. 2002 से लेकर 2017 तक चाहे वे सपा में रहे हों या निषाद पार्टी में जीत उन्हीं की होती थी. लेकिन 2022 के चुनाव में निषाद पार्टी (बीजेपी गठबंधन) के विपुल दुबे ने यहां से जीत दर्ज कर समीकरण बदल दिए. अब सवाल यह है कि क्या 2027 में विपुल दुबे अपनी सीट बचा पाएंगे या सपा इस बार बाजी पलटेगी? सबसे बड़ा सवाल उन 34,000 वोटों का है जो पिछली बार जेल में रहते हुए भी निर्दलीय विजय मिश्रा ने हासिल किए थे.
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वर्तमान विधायक विपुल दुबे का दावा
विधायक विपुल दुबे का कहना है कि उन्होंने ज्ञानपुर में उस 'गुंडाराज' और 'लूट' को खत्म किया है जो पिछले 25 सालों से कायम था. उनका दावा है कि उन्होंने क्षेत्र में अमन-चैन बहाल किया है और विकास के वो काम किए हैं जो दशकों से लंबित थे. वे 2027 में अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं और इसे 'एकतरफा चुनाव' बता रहे हैं.
समाजवादी पार्टी की तैयारी
सपा का मानना है कि पिछली बार प्रत्याशी चयन में हुई देरी और अफवाहों की वजह से वे चुनाव हार गए थे. सपा नेताओं का दावा है कि इस बार वे अधिक सजग हैं और भदोही की तीनों सीटों (ज्ञानपुर, औराई और भदोही) पर जीत हासिल करेंगे. उनका मानना है कि इस बार जनता बदलाव के मूड में है.
विजय मिश्रा के '34,000 वोट' किधर जाएंगे?
स्थानीय पत्रकारों का विश्लेषण है कि 2022 में निर्दलीय लड़ते हुए भी विजय मिश्रा को 16% (करीब 34,000) वोट मिले थे. चूंकि अब विजय मिश्रा जेल में हैं और उनका परिवार राजनीतिक रूप से उतना सक्रिय नहीं दिख रहा तो यह वोट बैंक ही 2027 की हार-जीत तय करेगा. यदि ये वोट सपा की ओर शिफ्ट हुए तो बीजेपी के लिए मुश्किल होगी और अगर विपुल दुबे इन्हें अपने पाले में लाने में सफल रहे तो उनकी राह आसान हो जाएगी.
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