यूपी किसका:क्या 2027 में प्रतिभा शुक्ला कर पाएंगी वापसी या अखिलेश यादव का PDA फॉर्मूला पड़ेगा भारी?

Akbarpur Raniya VidhanSabha 2027: क्या मंत्री प्रतिभा शुक्ला लगा पाएंगी जीत की हैट्रिक? लोकसभा चुनाव में सपा की 29,000 वोटों की बढ़त ने बढ़ाई बीजेपी की मुश्किल. जानें कानपुर देहात की इस सीट का जातीय समीकरण और क्या है सपा का पीडीए फॉर्मूला.

रजत सिंह

• 09:46 AM • 16 Mar 2026

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Akbarpur Raniya VidhanSabha 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है. कानपुर देहात की हाई-प्रोफाइल अकबरपुर-रनिया सीट पर सबकी निगाहें टिकी हैं. ऐसे में अपने बेबाक और अक्खड़ स्वभाव के लिए मशहूर प्रतिभा शुक्ला एक बार फिर चर्चा में हैं. कभी अपनी ही सरकार के अधिकारियों से भिड़ना तो कभी जनता के लिए धरने पर बैठ जाना, प्रतिभा शुक्ला हमेशा खबरों में बनी रहती हैं. हालांकि 2027 की राह उनके लिए इतनी आसान नहीं दिख रही है. 2024 के लोकसभा चुनावों में इस विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी को मिली बढ़त ने भाजपा के खेमे में हलचल पैदा कर दी है. क्या प्रतिभा शुक्ला का 'काम और चार्म' इस बार भी चलेगा या सपा का पीडीए (PDA) फॉर्मूला बाजी मार ले जाएगा?

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प्रतिभा शुक्ला की ताकत और पति का 'बसपा' कनेक्शन

प्रतिभा शुक्ला की सबसे बड़ी ताकत उनके पति अनिल शुक्ला वारसी का पुराना सियासी आधार है. अनिल शुक्ला बसपा में रहे हैं जिसके कारण उन्हें दलित वोटों का अच्छा समर्थन मिलता रहा है. प्रतिभा का अपना ब्राह्मण वोट बैंक और भाजपा का कैडर वोट मिलकर उन्हें अब तक जीत दिलाता आया है.2022 में उन्होंने सपा के प्रकाश कुशवाहा को करीब 17,000 वोटों से हराया था.

सपा का बढ़ता ग्राफ और पीडीए फॉर्मूला

समाजवादी पार्टी इस बार बेहद उत्साहित है. सपा नेताओं का कहना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में वे अकबरपुर-रनिया विधानसभा से लगभग 29,000 वोटों से आगे रहे हैं. सपा का मानना है कि पिछली बार टिकट वितरण की गलती की वजह से वे हारे थे. लेकिन इस बार पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन के जरिए वे 40,000 से अधिक वोटों से जीत दर्ज करेंगे.

जातीय गणित की उलझन

अकबरपुर-रनिया सीट पर जातीय समीकरण काफी निर्णायक हैं. यहां लगभग 80,000 दलित मतदाता हैं, जो किंगमेकर की भूमिका में रहते हैं. इसके बाद यादव (67,000), ब्राह्मण (41,000), पाल और मुस्लिम (25,000 प्रत्येक) मतदाताओं की बड़ी संख्या है. कुशवाहा समाज के करीब 18,000 वोट भी हार-जीत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं.

स्थानीय मुद्दे और पत्रकारों की राय

स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, लोकसभा चुनाव के परिणाम विधानसभा चुनाव पर गहरा असर डालेंगे. बीजेपी के लिए यूजीसी और कुछ धार्मिक मुद्दों से जुड़ा असंतोष भी एक चुनौती बन सकता है. हालांकि, विधानसभा चुनाव काफी हद तक स्थानीय प्रत्याशी के चेहरे पर निर्भर करेगा. प्रतिभा शुक्ला का दावा है कि वे चौपाल लगाकर जन-जन तक सरकार की उपलब्धियां पहुंचा रही हैं और जनता का आशीर्वाद उनके साथ है.