IAS Abhishek Prakash Story: भ्रष्टाचार के आरोपों से लेकर निजी जीवन के उतार-चढ़ाव तक आईएएस अभिषेक प्रकाश का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रहा है. 'इन्वेस्ट यूपी' के सीईओ रहते हुए रिश्वत मांगने के आरोप में सस्पेंड किए गए अभिषेक प्रकाश को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से बड़ी राहत मिलने के बाद अब शासन ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है. सोमवार को उनके पदभार ग्रहण करने की संभावना है. आइए जानते हैं बिहार के एक साधारण परिवार से निकलकर यूपी के 'पावर कपल' बनने और फिर विवादों के भंवर में फंसने वाले इस अधिकारी की पूरी कहानी.
ADVERTISEMENT
भ्रष्टाचार के आरोप और कोर्ट की क्लीन चिट
अभिषेक प्रकाश को 20 मार्च 2025 को निलंबित किया गया था. आरोप था कि उन्होंने 'इन्वेस्ट यूपी' में रहते हुए एक सोलर कंपनी के प्रोजेक्ट को पास करने के लिए बिचौलियों के जरिए 5% कमीशन की मांग की थी. हालांकि फरवरी 2026 में हाईकोर्ट ने इस मामले की चार्जशीट रद्द करते हुए कहा कि उनके खिलाफ कोई ठोस प्रमाण या नकदी की बरामदगी नहीं हुई है. इसी राहत के बाद उनकी बहाली का रास्ता साफ हुआ.
संघर्ष और सफलता का सफर
बिहार के सिवान जिले के एक साधारण परिवार में जन्मे अभिषेक प्रकाश बचपन से ही मेधावी थे. उन्होंने आईआईटी रुड़की से बीटेक किया और 2005 की यूपीएससी परीक्षा में टॉपर्स की सूची में जगह बनाकर सबको चौंका दिया. वह यूपी के कई अहम जिलों जैसे लखनऊ, बरेली, अलीगढ़ और हमीरपुर में जिलाधिकारी (DM) के पद पर तैनात रह चुके हैं. अभिषेक प्रकाश की निजी जिंदगी भी काफी चर्चा में रही. उनकी मुलाकात 2009 बैच की आईएएस अधिकारी अदिति सिंह से हुई जो बाद में प्यार और फिर शादी में बदली. दोनों को उत्तर प्रदेश का 'पावर कपल' कहा जाता था. हालांकि कुछ समय बाद रिश्तों में कड़वाहट आई और गंभीर आरोप-प्रत्यारोपों के बीच इस जोड़ी का तलाक हो गया.
अभी टली नहीं है पूरी आफत
भले ही भ्रष्टाचार के मुख्य मामले में उन्हें राहत मिल गई हो. लेकिन उन पर एक और तलवार लटक रही है. लखनऊ के डीएम रहते हुए सरोजनी नगर में 'डिफेंस कॉरिडोर' के भूमि अधिग्रहण में लापरवाही और अनियमितताओं के मामले में अभी भी विभागीय जांच जारी है.
ADVERTISEMENT









