UP SI Exam:उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर (SI) पद के लिए लिखित परीक्षा का आज अंतिम दिन है. प्रयागराज के विभिन्न केंद्रों पर हजारों की संख्या में परीक्षार्थी शामिल हुए. लेकिन परीक्षा हॉल के बाहर खड़ी भीड़ एक अलग ही कहानी बयां कर रही है. यहां कोई पिता किसान है, कोई ड्राइवर है तो कोई प्राइवेट नौकरी कर बड़ी मुश्किल से घर चला रहा है. इन परिजनों के लिए यह परीक्षा नौकरी पाने का जरिया मात्र नहीं बल्कि गरीबी और आर्थिक तंगहाली से बाहर निकलने का इकलौता रास्ता है. यूपी Tak ने इन परिजनों से बात की जहां उनके चेहरों पर थकान से ज्यादा अपने बच्चों के भविष्य को लेकर अटूट विश्वास नजर आया.
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किसान पिता की आखिरी उम्मीद
जौनपुर से आए एक बुजुर्ग पिता जो पेशे से किसान हैं. अपने इकलौते बेटे को परीक्षा दिलाने पहुंचे हैं. उन्होंने बताया कि वह रात 12 बजे से सोए नहीं हैं. घर का खर्चा बड़ी मुश्किल से चलता है. उन्होंने नम आंखों से कहा कि 'उम्मीद है कि बेटा नौकरी पाएगा तो घर की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और हमारी परेशानियां दूर होंगी. बुढ़ापे में यही एक सहारा है.' वहीं एक भाई अपनी छोटी बहन को परीक्षा दिलाने लाया है. उसके पिता मुंबई में प्रेस (स्त्री) का काम करते हैं. भाई का कहना है कि पिता का सपना है कि उनकी बेटियों को भी आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिले. उसने बताया कि 'अगर बहन सिलेक्ट हो जाती है तो पिता का सिर गर्व से ऊंचा हो जाएगा. समाज और गांव में लोग अपनी बेटियों को पढ़ाने के लिए मोटिवेट होंगे.'
ड्राइवर पिता और भाई का सपना
फतेहपुर से आई एक छात्रा के भाई ने बताया कि वह और उसके पिता दोनों ड्राइवर हैं. उनकी बहन कोचिंग कर अपनी मेहनत के दम पर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है. भाई का मानना है कि बहन की एक सरकारी नौकरी पूरे परिवार में खुशहाली ला देगी और उनकी पीढ़ियों का संघर्ष खत्म हो जाएगा.
दोस्तों का साथ और भविष्य की चिंता
सेंटर के बाहर ऐसे भी लोग मिले जो अपने दोस्तों का हौसला बढ़ाने आए थे. कोई खुद रेलवे में सिलेक्ट हो चुका है. लेकिन अपने दोस्त को यूपीएससी या एसआई बनते देखना चाहता है. इन युवाओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश में एक सरकारी नौकरी केवल व्यक्ति को नहीं बल्कि उसके पूरे कुनबे की किस्मत बदल देती है.
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