उन्नाव जिले की सफीपुर विधानसभा सीट (सुरक्षित) उत्तर प्रदेश की उन सीटों में से एक है जहां बीजेपी ने अपने मजबूत जातीय समीकरणों के दम पर समाजवादी पार्टी के गढ़ में सेंध लगाई है. आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए यहां की राजनैतिक सरगर्मी बढ़ चुकी है. आपको बता दें कि सफीपुर एक सुरक्षित सीट है, जहां फिलहाल बीजेपी का कब्जा है. बीजेपी के बंबालाल दिवाकर यहां से लगातार दो बार (2017 और 2022) विधायक चुने गए हैं.
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इससे पहले 2002 और 2012 में यहां समाजवादी पार्टी के सुधीर रावत जीते थे, जबकि 2007 में यह सीट बसपा के पास थी.
सफीपुर का जातीय समीकरण (अनुमानित आंकड़े)
यहां की जीत-हार में दलित वोटों की भूमिका सबसे अहम होती है:
- पासी (SC): 73,000 (सबसे बड़ा समुदाय)
- जाटव/रैदास (SC): 67,000 [02:24]
- ब्राह्मण: 36,000
- लोधी: 32,000
- मुस्लिम: 31,000
- क्षत्रिय: 22,000
- यादव: 20,000
बीजेपी की जीत का फार्मूला
सफीपुर में दलित वोटों का विभाजन बीजेपी की जीत का मुख्य कारण रहा है. बीजेपी यहां गैर-जाटव दलितों के साथ-साथ जाटव वोटों में भी सेंध लगाने में सफल रही है. बीजेपी का अपना कोर वोट बैंक (ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य) यहां एकजुट होकर बंबालाल दिवाकर का समर्थन करता रहा है. विधायक बंबालाल दिवाकर अपनी जीत के लिए क्षेत्र में 'चौमुखी विकास' और जनता के लिए अपनी 24x7 उपलब्धता को आधार मानते हैं.
समाजवादी पार्टी की चुनौती (PDA फार्मूला)
सपा इस बार अपने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले के जरिए दलितों, यादवों और मुस्लिमों का एक मजबूत गठजोड़ बनाने की कोशिश कर रही है. सपा नेताओं का दावा है कि 2027 में 'PDA का रथ' चलेगा और वे इस सीट पर वापसी करेंगे.
क्या कहते हैं स्थानीय जानकार?
स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, वर्तमान समीकरण बीजेपी के पक्ष में नजर आते हैं. विकास कार्यों और सरकार की योजनाओं के दम पर बीजेपी यहां तीसरी बार भी वापसी कर सकती है.
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