बाराबंकी में आयोजित 'संवैधानिक अधिकार बचाओ, भाईचारा बनाओ' महारैली में उस समय हड़कंप मच गया जब एक संदिग्ध शख्स सादे कपड़ों में कमर में पिस्तौल खोंसे मंच के बेहद करीब पहुंच गया. यह घटना तब हुई जब पहले से ही करणी सेना की ओर से चंद्रशेखर आजाद को जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं. हालांकि, सुरक्षा में तैनात कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसे दबोच लिया. संदिग्ध ने खुद को पुलिसकर्मी बताया. लेकिन पहचान पत्र न दिखा पाने पर उसे धक्का देकर मैदान से बाहर कर दिया गया. इस घटना ने बड़े नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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धमकियों के बीच सुरक्षा में सेंध
चंद्रशेखर आजाद की इस रैली को लेकर पिछले कई दिनों से करणी सेना और भीम आर्मी के बीच जुबानी जंग जारी थी. करणी सेना ने धमकी दी थी कि चंद्रशेखर अपने पैरों पर वापस नहीं जा पाएंगे. इसी तनावपूर्ण माहौल में जब एक शख्स पिस्तौल के साथ मंच की ओर बढ़ा, तो वहां मौजूद लोगों के होश उड़ गए.
खुद को बताया सिपाही पर नहीं मिली आईडी
पकड़े जाने पर संदिग्ध व्यक्ति ने अपना नाम अमित बताया और दावा किया कि वह पुलिस लाइन में तैनात सिपाही है और उसकी ड्यूटी इसी रैली में लगी है. लेकिन जब पुलिस अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों ने उससे पहचान पत्र (ID Card) मांगा तो वह कुछ भी नहीं दिखा पाया.संदेह होने पर सुरक्षाकर्मियों ने उसे तत्काल मंच से दूर किया और रैली स्थल से बाहर खदेड़ दिया. इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर वह व्यक्ति ड्यूटी पर था तो सादे कपड़ों में पिस्तौल लेकर मंच के इतने करीब कैसे पहुंच गया? और अगर वह फर्जी था तो उसने इतनी कड़ी सुरक्षा को कैसे भेद दिया? फिलहाल पुलिस के आला अधिकारी मामले की जांच की बात कह रहे हैं.
चंद्रशेखर आजाद का संदेश
घटना के बावजूद चंद्रशेखर आजाद ने रैली को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि बाराबंकी की जनता का अपार समर्थन यह साबित करता है कि बहुजन आंदोलन अब नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया और संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया.
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