उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय दो दिग्गज क्षत्रिय नेताओं बृजभूषण शरण सिंह और धनंजय सिंह की बढ़ती नजदीकी चर्चा का मुख्य केंद्र बनी हुई है. हाल ही में एक मंच पर साथ आकर इन दोनों नेताओं ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उनकी यह दोस्ती 2027 के चुनावी रण में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला सकती है.
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गोंडा से जौनपुर तक दोस्ती का संदेश
इस सियासी जुगलबंदी की शुरुआत गोंडा में आयोजित राष्ट्र कथा के दौरान देखी गई थी, जिसे हाल ही में जौनपुर के होली मिलन कार्यक्रम ने और मजबूती दी. इन दोनों मौकों पर दोनों नेताओं का एक साथ आना यह संदेश दे रहा है कि वे भविष्य के लिए किसी साझा राजनीतिक रणनीति पर काम कर रहे हैं. राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह जोड़ी इसी तरह साथ रही, तो आगामी चुनावों में भाजपा के स्थानीय समीकरणों और नीतियों को कड़ी चुनौती मिल सकती है.
संजय निषाद के आंसू और आरक्षण की मांग
इसी बीच, यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के भावुक होने से एक और राजनीतिक पहलू सामने आया है. भाजपा के साथ गठबंधन में मंत्री होने के बावजूद, वह अपनी पुरानी मांग बिंद और मल्लाह समुदाय को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा दिलाने को लेकर खासे सक्रिय हैं. माना जा रहा है कि उन्हें गठबंधन के भीतर वैसी तवज्जो नहीं मिल पा रही है जैसी वह उम्मीद कर रहे थे. आरक्षण के मुद्दे पर उनकी यह पीड़ा अब सार्वजनिक मंचों पर आंसुओं के रूप में बाहर आ रही है.
2027 के लिए बदलेंगे समीकरण?
बृजभूषण शरण सिंह और धनंजय सिंह की दोस्ती और दूसरी तरफ संजय निषाद की असंतुष्ट स्थिति, ये दोनों ही घटनाक्रम उत्तर प्रदेश की सत्तासीन पार्टी के लिए भविष्य की चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि 2027 के चुनावों से पहले ये गठबंधन और व्यक्तिगत समीकरण राज्य की राजनीति की दिशा और दशा बदलने की पूरी क्षमता रखते हैं।
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